क्या ध्वस्त होगी कलेक्ट्रेट की मस्जिद? 30 दिन की मोहलत के साथ वसूली का नोटिस भी

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद में नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. 36 पन्नों के आदेश में संबंधित पक्षों को 30 दिनों के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही सरकारी भूमि के कथित अनधिकृत उपयोग के लिए करीब 6.41 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश भी दिया गया है.

सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद Image Credit:

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद ने अब बड़ा कानूनी मोड़ ले लिया है. नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने 36 पन्नों का विस्तृत आदेश जारी करते हुए संबंधित पक्षों को 30 दिनों के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश दिया है. साथ ही सरकारी संपत्ति के कथित अनधिकृत उपयोग के एवज में करीब 6.41 करोड़ रुपये की वसूली का भी आदेश दिया गया है.

इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को ध्वस्त किया जाएगा, या मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचेगा? दरअसल, यह विवाद 2025 में उस समय सामने आया, जब बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद सरकारी भूमि पर बनी हुई है. शिकायत के बाद प्रशासन ने जांच शुरू की.

अदालत ने क्या कहा?

इसके बाद मामला नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा. नगर मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने अपने आदेश में कहा कि ग्राम पठानपुरा की खसरा संख्या-539 राजस्व अभिलेखों में कलेक्ट्रेट/कचहरी की सरकारी भूमि के रूप में दर्ज है. आदेश में उल्लेख किया गया कि यह भवन मूल रूप से कलेक्ट्रेट आने वाले लोगों के ठहरने और डाकघर जैसी सरकारी सुविधाओं के लिए उपयोग किया जाता था. बाद के सालों में यहां नमाज अदा की जाने लगी.

मस्जिद पक्ष ने क्या दलील दी?

सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष ने दावा किया कि यह मस्जिद 100 साल से अधिक पुरानी है और वक्फ संपत्ति है. इसके समर्थन में दस्तावेज और गवाह भी अदालत में पेश किए गए. कुछ गवाहों ने कहा कि वे बचपन से इस स्थान पर नमाज होते हुए देख रहे हैं. दूसरी ओर प्रशासन ने राजस्व अभिलेख, खतौनी और अन्य सरकारी रिकॉर्ड प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि संबंधित भूमि कभी भी वक्फ या धार्मिक स्थल के रूप में दर्ज नहीं रही.

30 दिन की मोहलत

नगर मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित पक्षों का कब्जा अनधिकृत माना जाता है. अदालत ने 30 दिनों के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही सरकारी संपत्ति के कथित अनधिकृत उपयोग के लिए 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लगभग 6.41 करोड़ रुपये की वसूली का भी आदेश दिया गया है. अब सवाल यह है कि मस्जिद पर बुलडोजर चलेगा या नहीं?

क्या तुरंत चलेगा बुलडोजर?

अदालत ने संबंधित पक्षों को 30 दिनों का समय दिया है. इस अवधि में वे आदेश का पालन कर सकते हैं या फिर उच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं. अगर निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश पर रोक नहीं मिलती और न ही आदेश का पालन किया जाता है, तो प्रशासन आगे की वैधानिक कार्रवाई कर सकता है. इसलिए तत्काल ध्वस्तीकरण तय नहीं माना जा सकता.

शिकायतकर्ता ने क्या कहा?

शिकायतकर्ता विकास त्यागी ने अदालत के फैसले को ‘सत्य की जीत’ बताते हुए कहा कि सरकारी परिसरों का उपयोग केवल सरकारी कार्यों के लिए होना चाहिए और सार्वजनिक भूमि पर किसी भी प्रकार का अनधिकृत कब्जा नहीं होना चाहिए.

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