पहले भड़काया, फिर भड़की हिंसा… संभल दंगे की जांच रिपोर्ट में सपा सांसद पर गंभीर आरोप
संभल में 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा को लेकर गठित तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने अपनी 857 पन्नों की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हिंसा अचानक नहीं भड़की थी, बल्कि यह पहले से रची गई सुनियोजित साजिश का नतीजा थी.
24 नवंबर 2024 संभल की जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद में कोर्ट के आदेश पर सर्वे करने गई टीम पर पथराव किया गया, गोलियां चलीं. इस भयावह हिंसा में 4 लोगों की मौत और दर्जनों सुरक्षाकर्मी घायल हुए. घटना के बाद हिंसा की जांच के लिए तीन-सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग गठित की गई, जिसने 857 पन्नों की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है.
रिपोर्ट में पुष्टी की गई है कि हिंसा अचानक नहीं भड़की थी, बल्कि यह पहले से रची गई सुनियोजित साजिश का नतीजा थी. आयोग ने कहा है कि लोगों को भड़काने, माहौल खराब करने और हिंसा फैलाने में कई लोगों की भूमिका सामने आई है. इसमें संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क समेत कुछ अन्य लोगों पर गंभीर आरोप हैं.
हिंसा में 28 पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घायल
रिपोर्ट के अनुसार, 19 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद के सर्वे का आदेश जारी होने के बाद ही विरोध की रणनीति तैयार की जाने लगी थी. सर्वे को लेकर लोगों में भ्रम फैलाने के लिए वीडियो और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया गया. लोगों को यह संदेश दिया गया कि मस्जिद पर कब्जा करने की कोशिश हो रही है, जिससे बड़ी संख्या में लोग भड़क गए.
24 नवंबर को सर्वे के दौरान भीड़ ने पुलिस और प्रशासनिक टीम पर सुनियोजित तरीके से पथराव किया. इसके बाद कई स्थानों पर आगजनी, गोलीबारी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाई गई. हिंसा के दौरान दंगा नियंत्रण सामग्री लूटे और हथियार छीनने की भी कोशिश की गई. इस घटना में 28 पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी घायल हुए.
सपा सांसद, MLA पुत्र और मस्जिद कमेटी की साजिश
आयोग के मुताबिक, कुछ लोगों ने राजनीतिक लाभ और स्थानीय वर्चस्व की लड़ाई के चलते माहौल को जानबूझकर तनावपूर्ण बनाया. रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क, विधायक पुत्र सोहेल इकबाल और जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी से जुड़े कुछ पदाधिकारियों के खिलाफ उकसावे और साजिश से जुड़े आरोप जांच में सामने आए हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक सांसद बर्क, सोहेल इकबाल, जफर अली, कासिम जमाल और मशहूद अली फारूकी ने मुकदमे के तथ्यों को छिपाकर ऐसा भ्रामक प्रचार किया कि हिंदू मस्जिद को ढहाना चाहते हैं. बर्क और सोहेल ने लोगों को उकसाया. जिले में मुस्लिमों के तुर्क और पठान गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई भी हिंसक माहौल का कारण बनी.
पुलिस की गोली से 4 लोगों की मौत नहीं, परिजन भी बोले
रिपोर्ट में हिंसा के दौरान चार लोगों की मौत का भी जिक्र है. यह भी कहा गया है कि फोरेंसिक जांच और घटनास्थल के वैज्ञानिक विश्लेषण में पुलिस फायरिंग से मौत होने की पुष्टि नहीं हुई. आयोग के अनुसार, मृतकों के परिजनों ने भी पुलिस की गोली से मौत का आरोप नहीं लगाया. एफएसएल और सीन री-क्रिएशन रिपोर्ट में भी यही तथ्य सामने आए हैं.
हिंसा की जांच के लिए शासन के 28 नवंबर 2024 के पत्र के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग गठित किया गया था. आयोग ने बीते दिन अपनी 857 पन्नों की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी. रिपोर्ट में हिंसा के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की प्रशंसा भी की गई.
