TV9 के मंच पर बोले ओवैसी- कौन सा कानून है, जो गंगा में खाना खाने को मना करता है
असदुद्दीन ओवैसी भी टीवी9 भारतवर्ष के सत्ता सम्मेलन में पहुंचे.उन्होंने गंगा में इफ्तार पार्टी करने वाले युवकों के मसले पर कहा कि कि ऐसा कोई भी कानून नहीं है, जो गंगा नदी में खाना खाने से मना करता है. उन्होंने कहा कि लोगों को गुमराह किया जा रहा है. गंगा में नाले के पानी गिरते हैं, क्या वो सही है. गंगा मां हैं तो उनका ध्यान क्यों नहीं रखा जाता है. गंगा नदी साफ क्यों नहीं है.
टीवी9 भारतवर्ष के सत्ता सम्मलेन में AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने गंगा में इफ्तार पार्टी करने वाले युवकों का मसला उठाया. इस दौरान ओवैसी ने कहा कि ऐसा कौन सा कानून है जो गंगा नदी में लोगों को खाना खाने से मना करता है, ऐसा कोई भी कानून नहीं है, बनारस वाले मामले में लोगों को जबरन फंसाया गया है, इस मुद्दे को भी लोगों ने राजनीतिक मुद्दा बना दिया है, जबकि एक भी ऐसा वीडियो नहीं है, जिसमें दिख रहा हो कि वहां उन लड़कों ने मांस खाया है.
उन्होंने कहा कि साफ तौर पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है. गंगा में नाले के पानी गिरते हैं, क्या वो सही है. गंगा मां हैं तो उनका ध्यान क्यों नहीं रखा जाता है. साफ क्यों नहीं है. उन्होंने कहा कि यही वह देश है. जहां मुसलमानों को ईद मनाने के लिए हाईकोर्ट जाना पड़ता है. दूसरी तरफ उन्हें खून की होली खेलने की धमकी दी जाती है.
‘देश मनमानी से नहीं, संविधान से चलेगा’
‘भाईजान का हिंदुस्तान’ सत्र में असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ओवैसी ने कहा कि देश मनमानी से नहीं, संविधान से चलेगा. सरकार राष्ट्रीयता को हिंदुत्व से जोड़ रही है. भारत में मुसलमान कोई चांद से नहीं आया. इसी जमीन के हैं, यहीं पैदा हुए है. मुसलमान देशभक्त हैं और भारत सबका है.
‘पीएम मोदी को इजरायल नहीं जाना चाहिए था’
असदुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा कि आज भारत क्या करेगा इसका फैसला ट्रंप ले रहे हैं. अमेरिका कौन होता है कि यह कहने वाला कि हम रूस से तेल ना खरीदें या फिर खरीद लें. ईरान पर हमला हुआ और हम 5 दिन तक चुप रहे. प्रधानमंत्री को इजरायल नहीं जाना चाहिए थे जब पीएम गए तो उनको मालूम था कि हमला होने वाला है.
‘5 दिन बाद हमले की निंदा की’
ओवैसी ने कहा कि सरकार ने जनवरी में ही नोटिस दिया था ईरान में जितने भारतीय हैं वो वापस आ जाएं. 5 दिन बाद हमने ईरान हमले की निंदा की. नुकसान भारत को हो रहा है. अब एलपीजी का संकट हो गया है. हमारा बासमती का चावल समुंदर में अटका हुआ है. गैस की भारी कमी हो गई.
