चिंतन शिविर जैसा था तिहाड़, जेल से छूटकर गांव पहुंचे राजपाल यादव; बताया भविष्य का प्लान
हास्य अभिनेता राजपाल यादव तिहाड़ जेल से 11 दिन बाद रिहा होकर अपने गांव पहुंचे. उन्होंने जेल के अनुभव को "चिंतन शिविर" बताया, जहां उन्होंने समाज और न्याय व्यवस्था पर विचार किया. अपने प्रशंसकों का आभार व्यक्त करते हुए, यादव ने जल्द ही अभिनय की दुनिया में लौटने और काम पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही, इसे अपनी रग-रग में बसा बताया.
तिहाड़ जेल से 11 दिन बाद छूटकर हास्य अभिनेता राजपाल यादव सीधे शाहजहांपुर स्थित अपने गांव कुंडरा पहुंचे है. यह वह अपने पारिवारिक में आयोजित मांगलिक समारोह में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने मीडिया से भी बात की. कहा कि तिहाड़ जेल में उनके 11 दिन चिंतन शिविर में रहने जैसा था. उन्होंने कहा कि जेलों में बहुत लोग हैं, जो कोर्ट कचहरी नहीं जा सकते. उनके प्रति सरकार को संजीदगी से विचार करना चाहिए.
जेल से छूटने के बाद राजपाल यादव ने सोशल प्लेटफॉर्म के अलावा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से अपने शुभचिंतकों और मदद करने वालों का आभार प्रकट किया है. कहा कि उनके करोड़ों फैंस हैं, जो उन्हें कभी दुखी नहीं देख सकते. उन्होंने कहा कि वह अभिनय को वह जीते हैं. उनकी रग-रग में संजीदगी और आप सभी को हंसाने गुदगुदाने की ललक हिलोर मारती रहती है. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अभिनय कला एक विज्ञान है और वह इस विज्ञान का विद्यार्थी हैं.
जल्द काम पर लौटेंगे
राजपाल यादव ने कहा कि वह जल्द ही अपने काम पर लौटेंगे. उन्होंने कोर्ट में लंबित मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया, कहा कि अब जो भी होगा कोर्ट में जवाब दिया जाएगा. बता दें कि राजपाल यादव को पिछले दिनों चेक बाउंस मामले में 5 फरवरी को दिल्ली की कोर्ट में सरेंडर कर दिया था. इसके बाद कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया था. मामला साल 2012 में उनकी फिल्म अता पता लापता से जुड़ा है.
यह है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक इस फिल्म को बनाने के लिए राजपाल यादव ने उन्होंने मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ का कर्ज लिया था. रिलीज होने के बाद यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से पिट गई. इसकी वजह से राजपाल यादव को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था. इसी मामले में चेक बाउंस, ब्याज और जुर्माने को मिलाकर कर्ज की रकम 9 करोड़ हो गई.