नागा साधुओं की तर्ज पर शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना का गठन करेंगे अविमुक्तेश्वरानंद, शस्त्र भी उठाएंगे
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने नागा साधुओं की तर्ज पर चतुरंगिणी सेना का गठन करने का फैसला किया है. उनका कहना है कि यह सेना जरूरत पड़ने पर सनातन की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने से भी परहेज नहीं करेगी.
ज्योतिष पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि वे शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना का गठन करेंगे, जो नागा साधुओं की परंपरागत सेना की तर्ज पर होगी. यह सेना गौ-रक्षा और सनातन धर्म की सुरक्षा के लिए काम करेगी. अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आगे कहा कि धार्मिक समाज में धर्मनिरपेक्ष शपथ नहीं, बल्कि धर्म की शपथ ही ली जाएगी. यदि परिस्थितियां बिगड़ीं तो शस्त्र उठाने से भी परहेज नहीं किया जाएगा.
अखाड़े हमारे साथ नहीं, तो अपनी अलग सेना बनाएंगे
बुधवार यानी 11 मार्च को लखनऊ के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल आशियाना में आयोजित गौ-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान की महासभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि साधु-संत समाज में भी विकृतियां और अशास्त्रीयता फैल रही है. कई अखाड़ों के महंत और साधु मुख्यमंत्री के साथ खड़े होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन शंकराचार्य के साथ नहीं. उन्होंने कहा, अगर अखाड़े हमारे साथ नहीं हैं, तो हम अपनी अलग सेना बनाएंगे.
‘शंकराचार्य ही सनातन की सर्वोच्च न्यायालय’
अविमुक्तेश्वरानंद ने सनातन धर्म को सुप्रीम कोर्ट का दर्जा देते हुए कहा कि शंकराचार्य ही सनातन की सर्वोच्च न्यायालय हैं. गौ-माता की रक्षा के साथ सनातन की रक्षा का संकल्प लेना होगा. आगे उन्होंने प्रयागराज माघ मेले में बटुकों के साथ हुए अन्याय का जिक्र करते हुए कहा कि वेद पढ़ने वाले बच्चों को लाठी और जूतों के योग्य समझा गया. गौ-वध की अनुमति देने वाले और मौन रहने वाले भी पाप के भागी हैं.
81 दिनों की गविष्ठि यात्रा गौ-युद्ध परिक्रमा यात्रा का ऐलान
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने एक और घोषणा की है. उन्होंने 81 दिनों की गविष्ठि यात्रा गौ-युद्ध परिक्रमा यात्रा का ऐलान किया है. यह यात्रा 3 मई 2026 से गोरखपुर से शुरू होकर 23 जुलाई 2026 को वहीं समाप्त होगी. यात्रा के बाद 24 जुलाई को गोरखपुर में ही बड़ी सभा होगी. यहां बड़ी संख्या में संत इकट्ठा होंगे. शंकराचार्य ने साधु समाज से दोहरा चरित्र त्यागने की अपील की और कहा कि संन्यासी या योगी का चरित्र कभी दोहरा नहीं हो सकता.
‘गौ-माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए था ये कार्यक्रम’
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद गौ-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान कार्यक्रम को गौ-माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने, गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए जनजागरण का हिस्सा बताया. उन्होंने कहा कि कि देशभर से संत, धर्माचार्य और गौ-रक्षक इस कार्यक्रम शामिल हुए. फिलहाल, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बयानों ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा छेड़ दी है.
