बज गया यूपी चुनाव का बिगुल, 2027 के लिए सबके एजेंडे में दलित वोटर, काशीराम जयंती पर बसपा-सपा और कांग्रेस का ये है प्लान

यूपी 2027 विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया. सभी पार्टियों ने दलितों को अपने पाले में लाने की क़वायद तेज कर दी है. इसी कड़ी में 15 मार्च को काशीराम जयंती पर मायावती लखनऊ में बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने जा रही है. वहीं, समाजवादी पार्टी ने इसे 'बहुजन समाज दिवस' या 'पीडीए दिवस' के रूप में मनाने का ऐलान किया है. इसके अलावा कांग्रेस भी 13 मार्च को लखनऊ में सोशल ट्रांसफॉर्मेशन कॉन्फ्रेंस आयोजित कर रही है. इसमें राहुल गांधी शामिल हो सकते हैं.

अखिलेश यादव, राहुल गांधी और मायावती

बहुजन समाज पार्टी ने अपने संस्थापक कांशीराम की 92वीं जयंती पर 15 मार्च 2026 को पूरे देश में अपनी राजनीतिक ताकत का भव्य प्रदर्शन करने की तैयारी की है. पार्टी सुप्रीमो मायावती के निर्देश पर बसपा के भव्य प्रदर्शन का यह कार्यक्रम खासतौर पर उन राज्यों में फोकस्ड है जहां आने वाले एक-डेढ़ साल में विधानसभा चुनाव होने हैं. लखनऊ में कांशीराम स्मारक स्थल पर मुख्य आयोजन होगा, जहां दो लाख से अधिक समर्थकों, कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के जुटने की संभावना जताई जा रही है.

पार्टी ने उत्तर प्रदेश में लखनऊ चलो अभियान जोर-शोर से चलाया है. प्रदेश के 12 मंडलों के कार्यकर्ताओं को लखनऊ पहुंचने का आह्वान किया गया है. बाकी छह मंडलों के लोगों को नोएडा के दलित प्रेरणा स्थल पर कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कहा गया है. बसपा सूत्रों के मुताबिक, यह आयोजन सिर्फ श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती का संदेश देने वाला होगा.

नौ राज्यों में शक्ति प्रदर्शन

मायावती ने कांशीराम जयंती को बहुजन आंदोलन की विरासत को मजबूत करने का अवसर बनाया है. यूपी के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, तेलंगाना, केरल, पश्चिम बंगाल और पंजाब में भी बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. पार्टी ने विभिन्न राज्यों के लिए जिम्मेदारियां बांटी हैं. आकाश आनंद को राजस्थान भरतपुर में होने वाले कार्यक्रम की जिम्मेदारी दी गई है. हरियाणा और पंजाब की जंग जिम्मेदारी रणधीर सिंह बेनीवाल मिली है.

मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी राजाराम को मिली है. महाराष्ट्र की जिम्मेदारी राम जी गौतम को तेलंगाना की जिम्मेदारी. अतर सिंह पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी. लालजी मेघाकर और केरल की जिम्मेदारी धर्मवीर अशोक को सौंप गई है. इन नेताओं को समर्थकों की भारी भीड़ जुटाने और कार्यक्रम को संबोधित करने का निर्देश दिया गया है. इस कार्यक्रम के जरिए बसपा यूपी समेत कई अन्य राज्यों में अपनी जमीन तलाशने की कोशिश में है.

सपा-कांग्रेस के रुख से बसपा सतर्क

कांशीराम जयंती पर इस बार यूपी में राजनीतिक माहौल गरम है. समाजवादी पार्टी ने इसे ‘बहुजन समाज दिवस’ या ‘पीडीए दिवस’ के रूप में मनाने का ऐलान किया है. सपा सभी जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम कर रही है, ताकि दलित-बहुजन वोटों को साधा जा सके. इसी तरह कांग्रेस भी कांशीराम को याद करने के लिए 13 मार्च को लखनऊ में सोशल ट्रांसफॉर्मेशन कॉन्फ्रेंस आयोजित कर रही है, जिसमें राहुल गांधी शामिल हो सकते हैं.

‘बहुजन सशक्तिकरण’ का संदेश देना चाहती हैं मायावती

बसपा इन विरोधी दलों की कवायदों से अतिरिक्त सतर्क है. मायावती अपना कार्यक्रम बड़े स्तर पर मनाकर बहुजन समाज की वोटों पर अपना दावा मजबूत करना चाहती है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि मायावती इस मौके पर समर्थकों को आगामी चुनावों के लिए एकजुट होने और ‘बहुजन सशक्तिकरण’ का संदेश दे सकती हैं. 15 मार्च को लखनऊ का कांशीराम स्थल बहुजन एकता और शक्ति का प्रतीक बनेगा.

Follow Us