राणा सांगा वाले बयान पर सपा सांसद रामजी लाल सुमन को झटका, हाईकोर्ट से रिट याचिका खारिज

समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदलत ने उनकी क्रिमिनल रिट याचिका खारिज कर दी. उन्होंने राणा सांगा पर विवादित बयान के बाद घर पर हमले के बाद सुरक्षा की गुहार लगाई थी. कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल होने का हवाला देते हुए यह याचिका खारिज की.

इलाहाबाद हाईकोर्ट (फाइल फोटो) Image Credit:

समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन को शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने रामजीलाल सुमन और उनके बेटे रंजीत सुमन की क्रिमिनल रिट याचिका खारिज कर दी है. सपा सांसद और उनके बेटे ने राणा संगा पर विवादित बयान के बाद अपनी सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जज जय कृष्ण उपाध्याय की डबल बेंच ने यह याचिका खारिज की है. अदालत ने सुनवाई में कहा कि मामले में चार्जशीट पहले ही जमा हो चुकी है, क्योंकि रिट याचिका में FIR को चुनौती दी गई है इसीलिए इस आधार पर याचिका को खारिज किया जाता है. कोर्ट ने इसके बाद इसे रिकॉर्ड में भेज दिया.

चार्जशीट रिपोर्ट 5 मई को कोर्ट में की गई थी पेश

पुलिस महानिदेशक कार्यालय ने सांसद रामजीलाल सुमन की ओर से राणा संगा पर विवादित मामले में चार्जशीट दाखिल कर दिया है. उन्होंने चार्जशीट की रिपोर्ट 5 मई 2026 को हाईकोर्ट में पेश कर दी थी. वहीं, अदालत ने मामले में चार्जशीट दाखिल होने का हवाला देते हुए सपा सांसद और उनके बेटे की रिट याचिका को खारिज करने का आदेश दिया.

हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सांसद अब कानून के तहत उपलब्ध अन्य विकल्पों का लाभ उठा सकते हैं. सपा सांसद और उनके बेटे ने अपने घर पर हुए हमले की जांच और सुरक्षा की गुहार लगाते हुए कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. 26 मार्च 2025 को आगरा स्थित घर पर हमला हुआ था. इस मामले में आगरा के हरिपर्वत थाने में अज्ञात पर FIR दर्ज कराई थी.

राज्यसभा में राणा संगा पर दिया था विवादित बयान

बता दें कि, समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने मार्च 2025 में राज्यसभा में मेवाड़ के सम्राट राणा सांगा पर विवादित टिप्पणी की थी. उन्होंने राणा सांगा को गद्दार बताते हुए कहा था कि वही बाबर को भारत में आमंत्रित किये थे. इसपर करणी सेना और बीजेपी नेताओं ने भारी विरोध जताया था. साथ ही इसे राष्ट्रपुरुषों का अपमान बताया गया. 

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