2161 करोड़ के शराब घोटाले में पूर्व आबकारी आयुक्त को जमानत, HC ने देश छोड़ने पर लगाई रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को जमानत दे दी है. निरंजन दास पर 2,161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले का आरोप है. कोर्ट ने नोएडा में दर्ज एफआईआर के मामले में यह राहत दी, जिसमें आरोप था कि उन्होंने अवैध होलोग्राम का उपयोग कर फायदा पहुंचाया.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2,161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को जमानत दे दी है. यह राहत नोएडा में दर्ज FIR से जुड़े मामले में मिली है. कोर्ट ने कहा कि केवल आपराधिक इतिहास के आधार पर किसी आरोपी को जमानत के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता.
निरंजन दास पर आरोप है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की आबकारी नीति और टेंडर प्रक्रिया तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. जांच एजेंसियों का दावा है कि जानबूझकर एक उन्होंने ऐसी नीति बनाई, जिससे नोएडा स्थित एक होलोग्राम निर्माता कंपनी ‘मेसर्स प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड’ को कथित रूप से अवैध लाभ पहुंचा.
छत्तीसगढ़ से नोएडा तक तार, क्या है मामला?
छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने शराब घोटाले में जनवरी 2024 में निरंजन दास समेत 70 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उत्तर प्रदेश प्रशासन को पत्र लिखकर जानकारी दी थी कि शराब घोटाले में इस्तेमाल होने वाले नकली और अवैध होलोग्राम नोएडा में बनाए जा रहे थे.
इस सूचना के आधार पर नोएडा के कासना थाने में आईपीसी की संगीन धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने निरंजन दास के आपराधिक इतिहास का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया. हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया.
बिना अनुमति देश छोड़कर न जाने का निर्देश
अदालत ने कहा कि केवल आपराधिक इतिहास के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता. बता दें कि इससे पहले मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट भी निरंजन दास को मुख्य शराब घोटाला और PMLA से जुड़े मामले में जमानत दे चुका है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी जमानत देते हुए उन्हें बिना अनुमति देश छोड़कर न जाने का निर्देश दिया है.
