यूपी में अपराध राष्ट्रीय औसत से 25% कम, महिला उत्पीड़न के मामले भी घटे; जानें NCRB की पूरी रिपोर्ट
NCRB 2024 रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश का अपराध दर राष्ट्रीय औसत से 25% कम है, कुल अपराधों में यह 18वें स्थान पर है. महिला अपराध दर भी घटा है, हालांकि साइबर क्राइम चिंताजनक बना हुआ है. डीजीपी राजीव कृष्ण ने इसे योगी सरकार की 'शून्य सहिष्णुता' नीति और पुलिस सुधारों का परिणाम बताया है.
NCRB की क्राइम इन इंडिया 2024 रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश का अपराध दर 180.2 है, जो राष्ट्रीय औसत 252.3 से काफी 25% कम है. कुल अपराधों में यूपी देश में 18वें स्थान पर है, जबकि जनसंख्या में इसका हिस्सा 17% है. लिस्ट में दिल्ली 1258.5 के साथ सबसे आगे, दूसरे पर केरलम 513 और तेलंगना 497.7 अपराध दर के साथ तीसरे स्थान पर है.
रिपोर्ट के मुताबिक, देश में साल 2024 में कुल 35,44,608 अपराध दर्ज किए गए, जिनमें से 4,30,552 अपराध
उत्तर प्रदेश में घटित हुए. जबकि साल 2023 में इसकी संख्या 4,28,794 और 2022 में 4,01,787 थी. प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध भी घटे हैं. साल 2023 में अपराध दर 58.6 था, जो अब 58 है. यूपी देश में 17वें स्थान पर है.
यूपी में साइबर क्राइम की हर दिन 30 मामले
वहीं, यूपी पुलिस FIR दायर करने में पहले स्थान पर है. यूपी 76.7% मामलों में आरोप पत्र (chargesheet) दाखिल किया है, जो राष्ट्रीय औसत (75.6%) से अधिक है. वहीं, रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में कोई सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए हैं. हालांकि, साइबर क्राइम की घटनाएं चिंता का विषय हैं, जहां औसतन हर दिन 30 मामले दर्ज होते हैं.
NCRB 2024 रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में रेप की घटना कम हुई है. साल 2023 में इसका अपराध दर 3.1 था, जो अब 2.8 है. इस मामले में यूपी का पूरे देश में 22वां स्थान है. वहीं, अपहर्ण के मामले में अपराध दर 4.9 है, जो साल 2023 में 7.0 था. इसके अलावा, यूपी में डकैती का मामला शून्य है, जबकि लूट, बलवा और बच्चों के खिलाफ अपराध दर काफी कमे हैं.
योगी सरकार की ‘शून्य सहिष्णुता’ नीति का परिणाम- DGP
पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने NCRB 2024 रिपोर्ट को योगी सरकार की ‘शून्य सहिष्णुता’ नीति और पुलिस सुधारों का परिणाम बताया है, जो नीति कागज़ों से निकलकर ज़मीन पर उतरी. उनका मानना है कि एक-एक ईंट रखकर उत्तर प्रदेश पुलिस ने कानून-व्यवस्था की जो इमारत खड़ी की है, NCRB के आंकड़े उसी की गवाही देते हैं.
उन्होंने कहा कि आधुनिक पुलिस स्टेशन, सतर्क एंटी-रोमियो स्क्वॉड, हर थाने पर समर्पित महिला हेल्प डेस्क, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और संगठित अपराध के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई. उतनी ही महत्वपूर्ण है पुलिस की खुली और सुलभ शिकायत दर्ज करने की अटूट प्रतिबद्धता. अधिक पंजीकरण एक अधिक संवेदनशील, सुलभ और पारदर्शी पुलिस बल की पहचान है.