कोतवाल ने पूरी की पिता की कमी, विधवा की बेटी की शादी से लेकर कन्यादान तक, सब कुछ संभाला

गंगोह कोतवाली प्रभारी पीयूष दीक्षित ने एक गरीब विधवा की बेटी की शादी करवाकर मानवता की मिसाल पेश की है. मिशन शक्ति से मदद मांगने आई सोमती देवी की परेशानी सुनकर, उन्होंने बेटी प्रीति की शादी की पूरी जिम्मेदारी ली. कोतवाल दीक्षित ने धर्मपिता बनकर कन्यादान भी किया, जिसके लिए उनकी खूब प्रशंसा हो रही है. यह कार्य पुलिस-जनता के बीच सद्भाव बढ़ाता है.

धर्मपिता के तौर पर कन्यादान

गंगोह कोतवाली प्रभारी पीयूष दीक्षित ने मानवता की एक बेहतरीन मिसाल पेश करते हुए एक सराहनीय कार्य किया है, जिससे उनकी हर तरफ तारीफ हो रही है. उन्होंने मदद का हाथ बढ़ाते हुए एक गरीब विधवा की बेटी की शादी कराई, जिसमें वह स्वयं धर्मपिता बने और बेटी का कन्यादान किया. इस नेक कार्य के लिए लोग उनकी खूब प्रशंसा कर रहे हैं. पुलिस का ये सहयोग सोमती देवी के लिए बड़ी राहत साबित हुआ और उनकी सभी चिंताएं दूर कर दीं.

छत्ता के रहने वाले महेंद्र सिंह के निधन के बाद, उनके परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी पत्नी सोमती देवी पर आ गई थी. उनकी चार बेटियों में से तीन की शादी हो चुकी थी, लेकिन चौथी बेटी प्रीति की शादी को लेकर वह बहुत परेशान थीं. मदद की उम्मीद से, बेटी की मां सोमती देवी मिशन शक्ति महिला हेल्प डेस्क, कोतवाली पहुंचीं और अपनी परेशानी सब-इंस्पेक्टर के सामने रखी.

पुलिस ने दिलाया भरोसा

महिला की समस्या को समझते हुए, कोतवाली प्रभारी पीयूष दीक्षित ने तुरंत उनकी सहायता करने का आश्वासन दिया. उन्होंने सोमती देवी को भरोसा दिलाया कि वह बेटी के लिए लड़का खोज लें; इसके बाद शादी की पूरी जिम्मेदारी वह उठाएंगे. इतना ही नहीं, उन्होंने मंडप में आकर कन्यादान करने का भी वादा किया.

धर्मपिता के तौर पर कन्यादान

सोमती देवी ने संसारपुर गांव के रहने वाले सोनू कुमार को वर के रूप में पसंद किया और 27 नवंबर को दोनों की शादी तय की गई. तय तिथि पर, कोतवाल पीयूष दीक्षित ने भोजन, दहेज और अन्य सभी तैयारियां पूरी कराईं. अपने वादे के अनुसार, वह शादी के मंडप में पहुंचे और धर्मपिता के तौर पर प्रीति का कन्यादान किया.

कोतवाली प्रभारी ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए शहरभर में प्रशंसा बटोरी है. उनका यह कदम दिखाता है कि पुलिस सिर्फ कानून व्यवस्था तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह सामाजिक जिम्मेदारी निभाने में भी आगे है. उनके इस कार्य ने ‘मिशन शक्ति’ जैसे सरकारी कार्यक्रमों के मूल उद्देश्य को सशक्त किया है.

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