दालमंडी मामले में HC का बड़ा फैसला, रिट याचिका खारिज; कहा- सार्वजनिक हित में धार्मिक स्थलों का अधिग्रहण वैध
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के दालमंडी मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक हित में धार्मिक स्थलों का अधिग्रहण कानूनन वैध है. याचिकाकर्ताओं, जो केवल किरायेदार थे, को स्वामित्व अधिकार नहीं मिले. साथ ही अदालत में दायर की गई रिट याचिका को खारिज कर दिया.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी की ऐतिहासिक दालमंडी मार्केट में सड़क चौड़ीकरण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. साथ ही इस परियोजना को चुनौती देने वाली रिट याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने इस मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य की संप्रभु शक्ति के तहत सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए धार्मिक स्थलों का अधिग्रहण कानूनन वैध है.
यह रिट याचिका दालमंडी मार्केट स्थित दुकानों के छह किरायेदारों की ओर से दाखिल की गई थी. इसमें मांग की थी कि उन्हें उनकी दुकानों से जबरन बेदखल न किया जाए और क्षेत्र में पुलिस की तैनाती पर रोक लगाई जाए. इसके अलावा, याचिका में सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे दालमंडी के छह प्राचीन मस्जिदों के संरक्षण की भी मांग की गई थी.
सार्वजनिक हित में धार्मिक स्थलों का अधिग्रहण वैध
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जे.जे. मुनीर और जज अरुण कुमार की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रिट याचिका को खारिज कर दिया. अपने विस्तृत आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता केवल किरायेदार हैं और उन्हें संबंधित संपत्तियों पर किसी प्रकार का स्वामित्व अधिकार प्राप्त नहीं है.
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने किरायेदारी के सामान्य कानूनी मुद्दों को धार्मिक स्थलों के संरक्षण जैसे अति-संवेदनशील मुद्दों के साथ मिलाकर एक जटिल याचिका तैयार की है, जो तार्किक रूप से उचित नहीं है. अदालत ने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम इसे रोकता है, लेकिन सरकार को सार्वजनिक हित के लिए इसका अधिग्रहण करने से नहीं रोकता है.
नमाज पढ़ना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं- HC
अदालत ने याचिका में उठाए गए विभिन्न मुद्दों को तथ्यों और कानून के आधार पर असंगत मानते हुए इसे खारिज कर दिया, जिसमें वैकल्पिक मार्ग विकसित करने का भी आग्रह किया गया था. साथ ही सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का जिक्र करते हुए खंडपीठ ने दोहराया कि नमाज पढ़ना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है, इसे खुले में भी पढ़ा जा सकता है.
इससे पहले हाईकोर्ट ने दालमंडी में ध्वस्तीकरण पर अंतरिम रोक लगा दी थी. साथ ही मामले की अगली सुनवाई (20 जुलाई) तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था. वहीं, अब रिट याचिका खारिज होने और कोर्ट के इस फैसले के बाद वाराणसी की दालमंडी सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है.
