वाराणसी एयरपोर्ट पर पिस्टल से चली गोली ने उड़ाए होश; फ्लाइट में गन ले जाने के क्या हैं नियम?
वाराणसी एयरपोर्ट पर गोली चलने के मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. यात्री कमलेश राय की लाइसेंसी पिस्टल से यह घटना जांच के दौरान हुई. पुलिस इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है. इस कड़ी में जानिए फ्लाइट में पिस्टल ले जाने के क्या नियम हैं?
वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर रविवार को लाइसेंसी पिस्टल की जांच के दौरान अचानक गोली चलने से हड़कंप मच गया. आजमगढ़ निवासी कमलेश राय मुंबई जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे थे. इसी दौरान उनके लाइसेंसी हथियार की निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच की जा रही थी, तभी पिस्टल से अचानक एक राउंड फायर हो गया.
आजमगढ़ निवासी और मुंबई के पूर्व पार्षद कमलेश राय अपनी पत्नी के साथ एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX1810 से वाराणसी से मुंबई जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे थे. बताया जा रहा है कि कमलेश राय ने एयरपोर्ट अथॉरिटी को पहले जानकारी दी थी. इस घटना में एयरपोर्ट पर मौजूद दो कर्मचारी घायल हुए हैं. वहीं, अब मामले में FIR भी दर्ज कर लिया है.
वेपन की जांच के दौरान चली गोली
फूलपुर थाने ने बताया कि प्राप्त तहरीर के आधार पर बीएनएस की धारा 125 (ए ), (बी) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. घटना के समस्त पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है. साथ ही एयरपोर्ट पर अपनाई जा रही सुरक्षा प्रक्रिया और संबंधित एजेंसियों की भूमिका की भी जांच होगी. कमलेश राय को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है.
पुलिस के मुताबिक, एयरपोर्ट पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनके रजिस्टर्ड बैगेज और लाइसेंसी हथियार की जानकारी दर्ज की जा रही थी. संबंधित एयरलाइन और AAICLAS के अधिकृत कर्मचारी वेपन की डिटेल और राउंड की संख्या दर्ज कर रहे थे. इसी दौरान पिस्टल की मैगजीन निकाली गई. पिस्टल के चैंबर में एक राउंड मौजूद था और फायर हो गया.
शुरूआती जानकारी के अनुसार, पिस्टल को कॉक या हैमर की स्थिति में लाने के दौरान कथित तौर पर ट्रिगर दब गया और अचानक फायर हो गया. गोली चलने से एयरपोर्ट पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई थी.
फ्लाइट में पिस्टल ले जाने के क्या हैं नियम?
दरअसल, लाइसेंसी हथियार होने का मतलब यह नहीं है कि यात्री उसे अपने साथ केबिन में लेकर विमान में बैठ सकता है. वाराणसी के एयरपोर्ट डायरेक्टर पुनीत गुप्ता ने बताया कि पिस्टल और गन लेकर यात्रा करने का एक प्रोसीजर होता है. आम तौर पर यात्री को चेक-इन के दौरान एयरलाइन को हथियार के बारे में जानकारी देनी होती है.
पुनीत गुप्ता ने बताया कि एक प्रोटोकॉल के तहत प्रॉपर डॉक्यूमेंटेशन और सिक्योरिटी चेक कर उसकी वेइंग होती है. जितने भी हमारे शूटर (स्पोर्ट्स पर्सन ), मिलिट्री/पारा मिलिट्री ऑफिसर्स और सिक्योरिटी ऑफिसर्स हैं वो सब वेपन लेकर यात्रा करते हैं. लेकिन वेपन पैसेंजर केबिन और पैसेंजर बैगेज में नहीं जाता. वेपन एक अलग केबिन में जाते हैं.
ये वेपन पायलट कमांड और प्रॉपर सिक्योरिटी में जाते हैं. गन/पिस्टल अलग और बुलेट्स अलग जाती हैं. इनका प्रॉपर डॉक्यूमेंटेशन और तौल होती है. पिस्टल/गन अनलोडेड होनी चाहिए. इनमें कोई कारतूस लोड नहीं होना चाहिए. अनलोडेड पिस्टल/गन और बुलेट्स दोनों को मजबूत बॉक्स में पैक करना जरूरी होता है.
पिस्टल अनलोड क्यों नहीं थी, बुलेट कैसे चली?
यानी नियमों का मकसद साफ है, हथियार यात्री की पहुंच से दूर रहे और उसकी हैंडलिंग केवल निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत हो. एयरलाइन के नियमों के मुताबिक सामान्य तौर पर एक लाइसेंसी पिस्टल/रिवॉल्वर/शॉटगन और 50 कारतूस तक ले जाने का प्रावधान है, हालांकि कुछ श्रेणियों, खासकर खेल निशानेबाजों के लिए अलग नियम लागू हो सकते हैं.
एंट्री गेट और काउंटर पर CISF और एयरलाइन स्टाफ को बताना होता है कि आपके पास लाइसेंसी हथियार है. आज के मामले में भी प्रोटोकॉल फ़ॉलो करते समय ही गोली चली. लाइसेंस के पेपर चेक हो रहे थे और डॉक्यूमेंटेशन हो रहा था. उसी दौरान पिस्टल से गोली चली. अब पिस्टल अनलोड क्यों नहीं थी? बुलेट कैसे चली? ये सब पुलिस इन्वेस्टिगेशन का हिस्सा है.