होनी थी रीढ़ की सर्जरी, डॉक्टरों ने कर दिया जांघ का ऑपरेशन; BHU में मरीज की मौत

बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में गंभीर चिकित्सा लापरवाही सामने आई है. यहां रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर की सर्जरी के लिए आई 71 वर्षीय महिला मरीज का डॉक्टरों ने गलती से जांघ का ऑपरेशन कर दिया. इस बड़ी चूक और बाद में हुई जटिलताओं के कारण मरीज की 20 दिन बाद मौत हो गई. घटना ने अस्पताल के सुरक्षा प्रोटोकॉल और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं. प्रशासन ने जांच समिति का गठन किया है.

बीएचयू में गलत ऑपरेशन से मरीज की मौत Image Credit:

पूर्वांचल के एम्स कहे जाने वाले वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में एक हैरान करने वाली घटना हुई है. यहां ट्रॉमा सेंटर में भर्ती एक मरीज की रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर का ऑपरेशन होना था. लेकिन डॉक्टरों ने उसकी जांघ का ऑपरेशन कर दिया. इस लापरवाही और ऑपरेशन के बाद उत्पन्न जटिलताओं के चलते 71 वर्षीय महिला मरीज की मौत हो गई है. अब कहा जा रहा है कि पहचान में भ्रम के कारण यह गड़बड़ी हुई है. इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली, मरीजों की सुरक्षा प्रोटोकॉल और विभागीय समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

जानकारी के मुताबिक अस्पताल में राधिका नाम की दो महिला मरीजों को भर्ती किया गया था. एक मरीज न्यूरोसर्जरी विभाग में तो दूसरी ऑर्थोपेडिक्स में भर्ती थीं. 7 मार्च 2026 को न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती 71 वर्षीय महिला मरीज, जिनका रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर का ऑपरेशन निर्धारित था, को गलती से ऑर्थोपेडिक्स ऑपरेशन थिएटर में पहुंचा दिया गया. वहां डॉक्टरों ने बिना जांच-पड़ताल किए ही उसकी जांघ का ऑपरेशन शुरू कर दिया. वहीं ऑपरेशन के दौरान जब चिकित्सकों को संबंधित समस्या नहीं मिली, तब उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और मरीज को तत्काल न्यूरोसर्जरी वार्ड में स्थानांतरित किया गया.

20 दिन बाद हुई मौत

गलत सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई. पहले उसे स्मृति ह्रास हुआ और दौरे पड़ने लगे. फिर जबड़े में जकड़न, मुंह में अल्सर और सांस लेने में कठिनाई जैसी गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ा. इसी बीच 27 मार्च 2026 को मरीज को सांस लेने में गंभीर समस्या हुई और कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट के बाद उसकी मृत्यु हो गई. इसके बाद महिला के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही, दुर्व्यवहार और उपचार में देरी का आरोप लगाते हुए हंगामा भी किया. इसके बाद जांच के आदेश हुए.

आरोपी डॉक्टर का नाम भी जांच समिति में

बीएचयू प्रशासन की लापरवाही यहीं नहीं रूकी, चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) के निदेशक ने शुरू में मामले की जांच के लिए जिस तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था, उसमें ऑर्थोपेडिक्स विभाग के उस डॉक्टर को भी रखा गया था, जिसने इतनी बड़ी गलती की. जब बवाल हुआ तो आनन फानन में समिति का पुनर्गठन किया गया है. अब नई जांच समिति का नेतृत्व आईएमएस के प्रो. अजीत सिंह कर रहे हैं. उन्हें पूरे मामले की जांच करने और बिंदुवार रिपोर्ट देने को कहा गया है.

सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल पर सवाल

इस घटना ने ट्रॉमा सेंटर की कार्यप्रणाली, मरीजों की सुरक्षा और प्रोटोकॉल पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है. आरोप लग रहे हैं कि यहां मानकों का पालन नहीं होता. कायदे से मरीजों को भर्ती करने से लेकर उनके इलाज पूरे होने तक मरीज की पहचान सत्यापन, सर्जिकल साइट मार्किंग, प्री-ऑपरेटिव चेकलिस्ट, विभागों के बीच समन्वय आदि बिंदुओं का ध्यान रखा जाता है. इस मामले में इन सभी बिंदुओं को नजरअंदाज किया गया है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल व्यक्तिगत गलती नहीं, बल्कि संस्थागत और प्रणालीगत खामियों की ओर भी संकेत करती हैं.

क्या बोले जिम्मेदार?

बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने घटना पर बयान दिया है. कहा कि मामले पर संज्ञान लेते हुए चिकित्सा विज्ञान संस्थान ने जांच समिति का गठन किया है. जांच रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई होगी. वहीं आईएमएस बीएचयू प्रो. एसएन संखवार ने इसे गंभीर मामला बताया. कहा कि जांच के लिए आईएमएस के प्रो. अजीत सिंह की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है. इस गड़बड़ी के जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी.

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