बृजेश सिंह के चुनाव लड़ने से क्यों असहज हो गए सपा सांसद? पूर्वांचल में गरमाई राजनीति
पूर्वांचल के बाहुबली बृजेश सिंह के आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा तेज है. यह सियासी हलचल समाजवादी पार्टी खेमे में खलबली मचा रही है. 2012 में हार के बावजूद, अब बदली हुई परिस्थितियों में बृजेश सिंह राजनीतिक वापसी की तैयारी में हैं, जिससे क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच पूर्वांचल की राजनीति में एक नई चर्चा ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है. पूर्व एमएलसी और बाहुबली नेता बृजेश सिंह के चुनावी मैदान में वापसी की संभावना ने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. चर्चा है कि बृजेश सिंह चंदौली जिले की सैयदराजा सीट से चुनाव मैदान में उतर सकते हैं.
इस खबर के सामने आने के बाद विशेष रूप से समाजवादी पार्टी के खेमे में बेचैनी देखी जा रही है. चंदौली से सपा सांसद वीरेंद्र सिंह से जब ये सवाल पूछा गया तो एकदम से असहज हो गए. पहले तो वो इसको हाइपोथेटिक सवाल बताएं. लेकिन जब कहा गया कि बृजेश सिंह ने ख़ुद चुनाव लड़ने की बात कही हैं, तो वो रिपोर्टर को ही बीजेपी भक्त बताने लगे.
पूर्वांचल में इस समय ठाकुर नेताओं की संख्या कम
हालांकि, बाद में सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि जब बृजेश सिंह का चुनाव चिन्ह तय हो जाएगा, तब वो इसपर अपनी प्रतिक्रिया देंगे. वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर वरिष्ठ पत्रकार पवन सिंह का मानना है कि समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह अच्छी तरह समझते हैं कि पूर्वांचल में इस समय बड़े ठाकुर नेताओं की संख्या बेहद सीमित है.
पवन सिंह के अनुसार, भाजपा नेता वीरेंद्र सिंह मस्त भी सक्रिय राजनीति के अंतिम चरण में माने जा रहे हैं. ऐसे में बृजेश सिंह के चुनाव लड़ने और सक्रिय राजनीति में आने से उनकी राजनैतिक संभावना पर विराम लग जाएगा. साथ ही वह पूर्वांचल की ठाकुर राजनीति का नया केंद्र बन सकते हैं, जिसका असर अन्य नेताओं की राजनीतिक संभावनाओं पर पड़ना तय है.
2012 में केवल 2 हजार वोटों के अंतर से मिली हार
पवन सिंह कहते हैं कि ऐसे में वीरेंद्र सिंह कभी नही चाहेंगे कि उनके ही चंदौली लोकसभा सीट से बृजेश सिंह जैसा बाहुबली नेता विधायक हो जाए. बृजेश सिंह 2012 में सैयद राजा से चुनाव लड़कर हार चुके हैं. साल 2012 में मनोज कुमार सिंह उर्फ डब्लू निर्दलीय उम्मीदवार थे. इन्होंने पीस पार्टी से चुनाव से चुनाव में उतरे पूर्वांचल के डान बृजेश सिंह को हराया था.
मनोज सिंह डब्लू को 29.23 फीसदी के साथ कुल 51499 वोट मिले थे जबकि 28.08 फीसदी के साथ डान बृजेश सिंह को 49483 वोट मिले. लेकिन तब परिस्थिति कुछ और थी. वो जेल में थे और उनपर माफिया डॉन होने का ठप्पा था. लेकिन अब 14 साल बाद की स्थिति पूरी तरह से बदली हुई है. बृजेश सिंह इस बदली हुई परिस्थिति का पूरा लाभ उठाना चाहेंगे.
मऊ सदर या गाज़ीपुर से क्यों नहीं लड़ेंगे चुनाव?
वरिष्ठ पत्रकार पवन सिंह का मानना है कि बृजेश सिंह कभी भी अनावश्यक टकराव या तनाव लेने में यकीन नहीं रखते हैं. यदि उनको ख़ुद चुनाव लड़ना है या अपने बेटे को चुनाव लड़ाना है तो वो पॉलिटिकल और प्रोफेशनल तरीके से चुनाव लड़ेंगे.
अंसारी परिवार से चुनावी टकराव से वो बचना चाहेंगे. मऊ सदर या गाज़ीपुर इसलिए भी प्राथमिकता में नहीं है.
उनका कहना है कि कोई भी पॉलिटिकल फैक्टर इन दोनों जगहों पर ऐसा नहीं है जो इनके फेवर में हो. साथ ही सपा के पीडीए फॉर्मूले को भी बृजेश सिंह दिमाग में रखेंगे. इसलिए मऊ सदर या गाज़ीपुर की किसी सीट से उनके चुनाव लड़ने की संभावना न के बराबर है. फिलहाल, बृजेश सिंह के चुनाव लड़ने की चर्चाओं ने पूर्वांचल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है.