एक साल पुरानी गंज-ए-शहीदा मस्जिद पर भी चलेगा बुलडोजर, रेलवे की नोटिस पर मचा हड़कंप

वाराणसी में काशी रेलवे स्टेशन के कायाकल्प हेतु गंज-ए-शहीदा मस्जिद पर 20 जून को बुलडोजर चलने की तैयारी है. रेलवे के नोटिस से हड़कंप मच गया है, जबकि मस्जिद कमेटी ध्वस्तीकरण का विरोध कर रही है. कमेटी का दावा है कि मस्जिद 1000 साल पुरानी है और रेलवे का नोटिस भ्रामक है. यह कार्रवाई ₹350 करोड़ के इंटर-मॉडल स्टेशन परियोजना का हिस्सा है.

काशी रेलवे स्टेशन के विकास में बाधा गंज शहीदा मस्जिद

उत्तर प्रदेश के बनारस में अजगैब शहीद मस्जिद के बाद अब एक साल पुरानी गंज-ए-शहीदा मस्जिद पर बुलडोजर चलाने की तैयारी है. इसके लिए 20 जून की तारीख मुकर्रर हुई है. रेलवे की ओर से नोटिस जारी होते ही हड़कंप मच गया है. यह कार्रवाई काशी रेलवे स्टेशन के कायाकल्प और मल्टी मॉडल हब के रूप में डेवलप करने के लिए किया जा रहा है. ₹350 करोड़ की लागत से यहां एयरपोर्ट जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं वाले ‘इंटर-मॉडल स्टेशन’ बनाया जाना है.

इस प्रोजेक्ट की जद में आने वाले सभी मस्जिद, मजार और मंदिरों को हटाने के लिए ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया गया है. इसी क्रम में बीते दो जून को दो सौ साल पुराने अजगैब शहीद मस्जिद को ध्वस्त किया गया. अब गंज-ए-शहीदा मस्जिद को ध्वस्त करने की तैयारी है. रेलवे और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई 20 जून को होनी है. इस संबंध में रेलवे ने नोटिस चस्पा कर दिया है. इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि यूनियन ऑफ़ इंडिया बनाम अंजुमन इंतज़ामिया मूलवाद संख्या -1174/1991 जो कि माननीय न्यायालय सिविल जज (जू. डी ) में चल रहा था उसको माननीय न्यायालय ने 28-8-2024 को खारिज कर दिया है.

मस्जिद कमेटी को दी गई सलाह

इसके बाद रेलवे प्रशासन ने अवैध रूप से बनी इस मस्जिद को हटाने का फरमान सुना दिया है. रेलवे प्रशासन ने 20 जून से पहले मस्जिद कमिटी को आवश्यक चीजें हटा लेने की सलाह दी है. इस नोटिस के बाद अंजुमन इंतज़ामिया मस्जिद कमिटी अब मस्जिद के बचाव में आ गई है. इस मस्जिद की देख रेख करने वाले अंजुमन इंतज़ामिया मसाजिद कमिटी के जॉइंट सेक्रेटरी मोहम्मद यासीन ने रेलवे के नोटिस के ठीक नीचे अंजुमन इंतज़ामिया मसाजिद कमिटी की तरफ से नोटिस चस्पा किया है.

रेलवे की नोटिस भ्रामक

मस्जिद कमेटी के मुताबिक रेलवे ने जो यह नोटिस चस्पा किया है, इसपर ना तो दिनांक है और ना ही हस्ताक्षर. कमेटी के मुताबिक मुक़दमे में फैसला नहीं हुआ है. अदम पैरवी के कारण ख़ारिज हुआ है. क्यों कि हमारे वकील रईस अंसारी साहब की बीवी कैंसर पीड़ित थीं. उनका इंतक़ाल भी हो गया. उस समय ज्ञानबापी मस्जिद के मुकदमात भी चरम पर थे. यह मुक़दमा अंजुमन मसाजिद ने गंज शहीदा मस्जिद के बाहर की ज़मीन को बचाने के लिए 1991 में दायर किया था.

एक हजार साल पुराना इतिहास

मस्जिद कमेटी के मुताबिक इस मस्जिद का निर्माण 1034 ईस्वी में हुआ था. 1880 के क़िलाकोहना के नक्शे में भी यह मौजूद है. 1883-84 के बन्दोबस्त नक्शे में भी यह मस्जिद मौजूद है. जबकि रेलवे स्टेशन 1887 में कायम हुआ. रेल प्रशासन ने अपने शपथ-पत्र में मस्जिद को निर्विवाद रूप से मुसलमानों की मिल्कियत तस्लीम किया है. यह वक्फ बोर्ड में दर्ज है. उम्मीद पोर्टल पर भी इसका रजिस्ट्रेशन है.

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