‘राहुल गांधी के खिलाफ सुनवाई करे निचली अदालत’, वाराणसी MP-MLA कोर्ट का फैसला
भगवान राम को काल्पनिक चरित्र बताने वाले राहुल गांधी के बयान पर हरिशंकर पांडे के केस को वाराणसी कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि विदेश में दिए बयान पर केंद्र की अनुमति जरूरी है. लेकिन अब एमपी एमएलए कोर्ट ने निचली अदालत को आदेश दिया है कि इस मामले की सुनवाई फिर से की जाए.
अपनी बयानबाजी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक बार फिर मुश्किलें बढ़ गई हैं.वाराणसी के एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज परिवाद को फिर से सुनने का आदेश दिया है. दरअसल, राहुल गांधी ने अमेरिका के बोस्टन में भगवान राम को एक काल्पनिक चरित्र माना था.
वाराणसी के हरिशंकर पांडे ने किया था केस
भगवान राम को लेकर राहुल गांधी के इस बयान पर वाराणसी के हरिशंकर पांडे ने केस किया था. अब इस मामले पर वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है. साथ ही फिर से निचली अदालत को इस मामले की सुनवाई करने का आदेश दिया है.
निचली अदालत ने केस को कर दिया था खारिज
भगवान राम को काल्पनिक चरित्र बताने वाले राहुल गांधी के बयान पर हरिशंकर पांडे के केस को वाराणसी कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि विदेश में दिए बयान पर केंद्र की अनुमति जरूरी है. लेकिन अब एमपी एमएलए कोर्ट ने निचली अदालत को आदेश दिया है कि इस मामले की सुनवाई फिर से की जाए.
एमपी-एमएलए कोर्ट ने कहा- सुनवाई के लिए केंद्र की अनुमति जरूरी नहीं
अब एमपी-एमएलए कोर्ट ने कहा है कि केस दर्ज करने के लिए अभी केंद्र की अनुमति जरूरी नहीं है. राहुल गांधी सांसद हैं, लोकसेवक नहीं, इसलिए दूसरी अनुमति भी नहीं चाहिए. कोर्ट ने आदेश दिया कि निचली अदालत इस मामले को फिर से सुने और कानून के मुताबिक फैसला करें.
आरोप साबित होने पर 5 साल तक की जेल
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने कहा कि संबंधित मजिस्ट्रेट सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों के आलोक में मामले की दोबारा सुनवाई करें और कानून के अनुसार नया आदेश पारित करें. बता दें कि जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की याचिका /शिकायत दाखिल की गई है उसमें पांच साल की सज़ा का प्रावधान है. अगर ऐसा होता है तो राहुल गांधी की सदस्यता जा सकती है.