कफ सिरप स्कैम: वाराणसी की सप्तसागर दवा मंडी में भूचाल, 15 दिन में ₹100 करोड़ का भारी नुकसान

कोडिन कफ सिरप प्रकरण के कारण पूर्वांचल की सबसे बड़ी दवा मंडी में भूचाल आ गया है. दवा व्यापार में 50% तक की गिरावट आ गई है. वाराणसी में सप्तसागर दवा मंडी को 15 दिन में ₹100 करोड़ का भारी नुकसान हुआ है. अमित सिंह और अन्य के नाम उछलने से व्यापारियों में डर का माहौल है.

कफ सिरप स्कैम से दवा व्यवसाय को झटका

कोडिन कफ सिरप की तस्करी मामले ने पूर्वांचल की सबसे बड़ी दवा मंडी सप्तसागर मंडी में भूचाल ला दिया है. कफ सिरप प्रकरण में अमित सिंह टाटा और धनंजय सिंह जैसे लोगों का नाम उछलने से दवा व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ा है. नतीजा ये है कि वाराणसी के दवा व्यवसाय में 50% की गिरावट आई है. पिछले 15 दिन में 100 करोड़ का नुकसान हुआ है.

सप्तसागर मंडी में ड्रग फर्मों की लगातार जांच होने से भी अब दवा व्यवसायी यहां खरीददारी करने से बच रहे हैं. इसका असर ये हो रहा है कि गाजीपुर, मिर्ज़ापुर और जौनपुर जैसे जिलों के व्यवसायी वाराणसी की बजाय प्रयागराज, लखनऊ और कानपुर का रुख कर रहे हैं. यूपी केमिस्ट एन्ड ड्रगिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष ने भी इसे अब तक का सबसे बड़ा संकट बताया.

सप्तसागर दवा मंडी के भरोसे की चूलें हिला दी

यूपी केमिस्ट एन्ड ड्रगिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष और सप्तसागर मंडी के महामंत्री संदीप चतुर्वेदी कहते हैं कि पहले भी लॉ एन्ड आर्डर और दूसरी चुनौतियां आईं लेकिन उनसे बहुत प्रभाव नहीं पड़ा. लेकिन इस मामले ने सप्तसागर दवा मंडी के भरोसे की चूलें हिला दिया है. पूर्वांचल की सबसे बड़ी दवा मंडी ‘सप्तसागर’ पर इससे पहले ऐसा संकट कभी नहीं आया था.

उन्होंने बताया कि सप्तसागर मंडी से रोज का दस से बारह करोड़ की खरीद बिक्री है. लेकिन कफ सिरप मामले ने पिछले 15 दिनों में व्यापार का बड़ा नुकसान किया है. 15 दिनों में ही करीब 100 करोड़ का नुकसान हुआ है. 12 बिस्वा में बने इस दवा मंडी में कुल 506 मेंबर्स हैं. 1995 से ये दवा मंडी है इसके पहले बुलानाला में ये मंडी हुआ करती थी.

शुभम की संपत्ति सिर्फ दवा कारोबार से संभव नहीं

दवा व्यवसायी रमेश निरंकारी कहते हैं कि बहुत से दवा व्यवसायी दवा के साथ-साथ जमीन, होटल और शराब जैसे व्यवसाय से भी जुड़े हैं. शुभम जायसवाल 12 साल पहले होलसेल का लाइसेंस लिया और आज उसके पास दो हज़ार करोड़ की संपत्ति खड़ी है. ये सिर्फ दवा के व्यवसाय से संभव नहीं है. वो जमीन, शराब और होटल के व्यवसाय से भी जुड़ा हुआ था.

संदीप चतुर्वेदी कहते हैं कि कोई उसको अरबपति बता रहा है, तो कोई उसको सरगना बता रहा है. सच तो ये है कि शुभम जायसवाल के पास होलसेल का लइसेंस है और वो अभी भी दवा संगठन का सदस्य है. हल्ला हो रहा है कि 100 करोड़ का फेंसेडिल बेच दिया. लेकिन कितने दिन में ये कोई नहीं बता रहा है. इस मामले को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया जा रहा है.

व्यवसायों ने की सीबीआई जांच की मांग

व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा कहते हैं कि इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए. व्यापारी डरा हुआ है और व्यापार पर इस मामले का बहुत बुरा असर पड़ा है. लिहाजा इस पूरे मामले की सीबीआई जांच करा कर दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया जाए. शुभम के फ़ोटो जिस किसी के साथ भी वायरल है, उसपर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.

व्यवसायी शाहिद कुरैशी कहते हैं कि इस प्रकरण के बहाने व्यापारियों का उत्पीड़न बंद होना चाहिए. जांच के नाम पर व्यापारियों को प्रशासन डरा रहा है. सीबीआई जांच से दवा मंडी की साख को भी बल मिलेगा. इस मामले में अभी तक 87 फर्म और 28 लोगों के ख़िलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है. शुभम जायसवाल के खिलाफ कुल पांच मुकदमे दर्ज हैं.