जानबूझकर हवा में लहराया गया था वाराणसी रोपवे का गोंडोला, जानिए ये टेस्ट क्यों होता है अहम?
वाराणसी में हवा में लहराते गोंडोला के वीडियो पर मंडलायुक्त ने स्पष्टीकरण दिया है. उन्होंने बताया कि यह शहर की पहली अर्बन रोपवे परियोजना की लोडिंग और स्विंगिंग कैपेसिटी का सुरक्षा ट्रायल था. इसमें लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि यह परियोजना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है.
बनारस की हवा में गोंडोला लहराने को लेकर तरह तरह की बातें कही जा रही हैं. अफवाह उठने की संभावना को देखते हुए वाराणसी के मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने खुद मामले की पूरी सच्चाई सामने रखते हुए स्थिति को साफ कर दिया है. मीडिया के माध्यम से उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि गोंडोला के हवा में लहराने से घबराने जैसी कोई बात नहीं है. दरअसल इस समय वाराणसी रोप वे की लोडिंग और स्विंगिंग कैपेसिटी का ट्रायल चल रहा है.
मंडलायुक्त ने कहा कि किसी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मिसलीडिंग वीडियो डाल दिया है. इससे लोगों में कन्फ्यूजन की स्थिति बन गई है. उन्होंने शहर वासियों को बताया कि काशी में देश की पहली अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे परियोजना मई तक शुरू करने की तैयारी है. इसी क्रम में इस प्रोजेक्ट की सेफ्टी का ट्रॉयल किया जा रहा है. इसमें शहर वासियों को ना तो घबराने की जरूरत है और ना ही डरने की आवश्यकता है.
ऐसे हुई लोड टेस्टिंग
मंडलायुक्त के मुताबिक नेशनल हाईवे लाजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) ने दिसंबर के तीसरे हफ़्ते में पहले चरण का लोड टेस्ट शुरू किया है. 800 किलोग्राम सैंड बैग (50 किग्रा रेत से भरी बोरियां) से लोड टेस्ट किया जा रहा है. छह मीटर प्रति सेकंड की अधिकतम गति से लोड टेस्टिंग हो रही है. पहले चरण की ये टेस्टिंग 25 जनवरी तक चलेगी.अभी सीमित दूरी में ही ट्रायल हो रहा है. लेकिन मार्च में स्टेशन्स बन कर तैयार होने के बाद दूसरे फेज़ की टेस्टिंग शुरू होगी. इसमें पूरे रोपवे कॉरिडोर यानी कैंट, विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरिजाघर और गोदौलिया को शामिल किया जाएगा.
छह चरणों में होनी है टेस्टिंग
मंडलायुक्त के मुताबिक इतना होने के बाद स्विट्जरलैंड और आस्ट्रिया के विशेषज्ञों की निगरानी में पांच से छह चरणों में टेस्टिंग होगी. इसमें सुरक्षा को कसौटी पर परखने के बाद ही आगे काम होगा. स्विस कंपनी बर्थोलेट, रोप वे की सेफ्टी कंसलटेंट कंपनी (ऑस्ट्रियायी) और एक्सपर्ट कंपनी (स्पेनिश) के अप्रूवल के बाद ही इसे शुरू किया जाएगा. उन्होंने बताया कि अप्रैल के पहले सप्ताह तक रथयात्रा से गोदौलिया (एक किलोमीटर) तक रोप पुलिंग शुरू होगी.
10 में से लग चुके हैं 8 टॉवर
इसके लिए 10 में आठ टावर लगाए जा चुके हैं. इन दिनों ड्राइव स्टेशनों पर इलेक्ट्रो मैकेनिकल सिस्टम का परीक्षण चल रहा है. सिस्टम से होने वाली आवाज को नियंत्रित करने की कोशिश हो रही है. ब्रेक लगाने की प्रणाली व्यवस्थित हो रही. केबिनों को जोड़ने वाले हिंज का संतुलन बनाने की कोशिश है. सभी बाईपास सिस्टम को मुख्य नियंत्रण प्रणाली से जोड़ा जा रहा है.
