काशी में 6 अप्रैल से संकट मोचन संगीत समारोह, 12 पद्म विजेता और 14 मुस्लिम कलाकार करेंगे शिरकत

काशी में 6-11 अप्रैल तक 103वां संकट मोचन संगीत समारोह आयोजित हो रहा है. यह वास्तव में एक धर्मनिरपेक्ष मंच है, जहां जाति-धर्म से ऊपर उठकर कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं. इस बार 12 पद्म पुरस्कार विजेत और 14 मुस्लिम कलाकार शिरकत कर रहे हैं. के साथ-साथ नए प्रतिभाओं को विशेष बढ़ावा मिलेगा.

बनारस में 6 अप्रैल से 103वां संकट मोचन संगीत समारोह

काशी में 6-11 अप्रैल तक 103वां संकट मोचन संगीत समारोह आयोजित हो रहा है. संकट मोचन मंदिर के प्रांगण में में शास्त्रीय संगीत परम्परा में पारंगत देश भर से कलाकार जुटेंगे. इस बार पद्म पुरस्कारों की तुलना में नए कलाकारों को ज़्यादा तवज्जो दी गई है. 11 पद्म पुरस्कारों की तुलना में 21 नए कलाकारों को समारोह में जगह दी गई है.

संकट मोचन दरबार में शास्त्रीय संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा. पंडित विश्व मोहन भट्ट, पंडित शिव मणि, उस्ताद अकरम खान, पंडित संजू सहाय, पंडित अनूप जलोटा, पंडित रोनू मजूमदार, पंडित साजन मिश्र और विदुषी मालिनी अवस्थी जैसे कलाकार इस संगीत समारोह में शिरकत करेंगे. 45 मुख्य कलाकार सहित 150 से ज़्यादा कलाकारों शिरकत करेंगे.

103 साल पहले संगीत समारोह की रखी गई नींव

103 साल पहले 1923 में संकट मोचन मंदिर के महंत अमरनाथ मिश्र ने संकट मोचन संगीत समारोह की जो नींव रखी थी आज इसकी पहचान देश के सबसे प्रतिष्ठित संगीत समारोह के रूप में होती है. ये देश का सही मायने में सेक्युलर संगीत समारोह है, जिसमें धर्म जाति की कोई बाधा नहीं है. मंदिर के महंत प्रोफेसर विश्वम्भर नाथ मिश्र से खास बातचीत की.

सवाल : इस बार के संगीत समारोह में विशेष क्या है?
उत्तर (संकट मोचन के महंत ):
इस बार हमने पद्म पुरस्कारों की तुलना में नवोदित कलाकारों को ज़्यादा जगह दी है. इस संगीत समारोह का उद्देश्य शास्त्रीय संगीत में अच्छे कलाकारों को तैयार करना भी है.

सवाल : संकट मोचन संगीत समारोह में बनारस संगीत घराने की उपस्थिति लगातार कम क्यूं होते जा रही है?
उत्तर (संकट मोचन के महंत ): ऐसा नही है. इस बार भी बनारस संगीत घराने के कई कलाकारों को हमने आमंत्रित किया है. लेकिन ये भी सच है कि बनारस संगीत घराना जो देश में संगीत के मामले में सबसे ऊपर था अब उसकी वो जगह नही रह गई है. एक बड़ी वजह तो ये है कि कई बड़े कलाकार अब हमारे बीच नही रहें. तो ये जिम्मेदारी हमारी है कि ज़्यादा परिश्रम से हम संगीत की साधना करें और कलाकारों को मंच प्रदान करें.

सवाल : अगर हम कहें कि ये देश का सबसे सेक्युलर संगीत समारोह है? इस बार भी 14 मुस्लिम कलाकार शिरकत कर रहे हैं. इसको लेकर भी सवाल उठते हैं. जब आपने गुलाम अली को आमंत्रित किया था तब भी इस पर विवाद हुआ था?

उत्तर (संकट मोचन महंत ): गुलाम अली का विरोध करने वाले उनको सुनने के लिए पहली पंक्ति में थें. संगीत को आप जाति – धर्म में बांट सकते हैं? कोई सरहद है क्या संगीत की? जिसकी भी श्रद्धा है हनुमान जी में वो अपनी प्रस्तुति देने के लिए आता है. इस दरबार में कोई रोक टोक नहीं है.

सवाल : क्या काशी में संस्कृति और परम्परा के साथ खिलवाड़ हो रहा है?

उत्तर (संकट मोचन महंत ) : देखिए ये जिम्मेदारी हमारी है कि जो भी बनारस आए वो यहां से अच्छी स्मृतियाँ लेकर जाए. अभी सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र के कुछ लोग कह रहे थे कि अस्सी घाट पर गंगा आरती के नाम पर हमसे पैसे लिए गएं. ये ठीक नही है ये सब बंद होना चाहिए.काशी में जो निर्माण कार्य चल रहे हैं उसमें भी काशी की संस्कृति और परम्परा का सम्मान होना चाहिए. और यदि संभव हो तो काशी के लोगों की राय भी लेनी चाहिए….

संकट मोचन संगीत समारोह की पूरी लिस्ट :

  • 6 अप्रैल, सोमवार- रूपवाणी संस्था की प्रस्तुति (नृत्य नाटिका), पं. राहुल शर्मा (संतूर), सुश्री विधालाल (कथक), श्री एस. आकाश-श्री यद्नेश रायकर (बांसुरी-वायलिन), विदुषी मालिनी अवस्थी (गायन), श्री राहुल मिश्रा (तबला सोलो), पं. हरविंदर शर्मा (सितार) सुश्री शिखा भट्टाचार्या (कथक).
  • 7 अप्रैल, मंगलवार- पं. यू राजेश, पं. शिवमणि (मेण्डोलिन-ड्रम), पं. विश्वमोहन भट्ट-श्री सलील भट्ट (मोहनवीणा-सात्विक वीणा), श्री जरगाम अकरण खां, श्री खुर्रम अली नियाजी (तबला युगलबंदी), उस्ताद गुल्लाम अब्बास खां (गायन), पं. शुभ महाराज (तबला सोलो), पं. कुशल दास (सितार), पं. रतन मोहन शर्मा (गायन).
  • 8 अप्रैल, बुधवार: पं. उल्लाहस कसालकर-श्री ओजस प्रताप सिंह (गायन), पं. विवेक सोनार (बांसुरी), विदुषी जसपिन्दर नरूला (गायन), विदुषी कौशिकी चक्रवर्ती (गायन), पं. देवाशीष भट्टाचार्या (गिटार), पं. महेश काले (गायन), पं. आलोक लाहिड़ी-अभिषेक लाहिड़ी (सरोद)
  • 9 अप्रैल, गुरुवार: पं. देवज्योति बोस (सरोद), श्री कृतिया नरसिंह राणा (ओडिसी), पं. यू राजेश- राजेश वैद्या (मेण्डोलिन-सरस्वती वीणा), पं. अनूप जलोटा (गायन), पं. सतीश ब्यास (संतूर), पं. अजय पोहनकर (गायन), पं. जयतीर्थ मेउंडी (गायन).
  • 10 अप्रैल, शुक्रवार: पं. राममोहन महाराज (कथक), पं. तेजेन्द्र नारायण मजूमदार (सरोद), पं. रोनू मजूमदार (बांसुरी), विदुषी कंकना बनर्जी (गायन), उस्ताद मसकूर अली खां (गायन), श्री अमरेंद्र मिश्र (सितार), श्री अनिरुद्ध भट्टाचार्या (गायन), श्री अभिषेक व्यास (मकरंद वीणा).
  • 11 अप्रैल, शनिवार: पं. रतिकांत महापात्रा-श्रीमती सुजाता महापात्रा (ओडिसी), श्री मेहताब अली नियाजी (सितार), विदुषी कलापिनी कोमकली (गायन), श्री शिराज अली खां (सरोद), पं. अभय रुस्तम सोपोरी (शततंत्री वीणा), पं. हरीश तिवारी (गायन), उस्ताद शाकिर खां (सितार), पं. साजन मिश्र-श्री स्वरांश मिश्र (गायन).

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