28 साल बाद मुस्कराए बुद्ध! यूनेस्को की हेरिटेज लिस्ट में शामिल हुआ सारनाथ, PM मोदी ने किया ट्वीट

सारनाथ अब यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हो गया है, जिससे काशी में जश्न का माहौल है. 28 साल के लंबे इंतजार के बाद यह ऐतिहासिक पल आया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत प्रयासों से यह संभव हुआ है. इससे वाराणसी के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और भगवान बुद्ध की नगरी को वैश्विक पहचान मिलेगी.

सारनाथ

उत्तर प्रदेश की धर्म नगरी काशी के लिए दक्षिण कोरिया के बुसान शहर से अच्छी ख़बर आई. अब यूनेस्को की हेरिटेल लिस्ट में काशी के सारनाथ को भी शामिल कर लिया गया है. इस ख़बर के लिए काशी के लोग पिछले 28 साल से इंतज़ार कर रहे थे. उनका इंतजार खत्म होने की जानकारी खुद बनारस से सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए दी. इसके लिए उन्होंने काशी वासियों को बधाई भी दी.

सारनाथ को यूनेस्को की हेरिटेज लिस्ट में साल 1998 में टेंटेटिव तौर पर शामिल किया गया था. उसके बाद इसे स्थाई लिस्ट में शामिल करने के लिए 28 सालों से लगातार प्रयास हो रहे थे. लेकिन हर प्रयास में कोई न कोई कमी रह जाने की वजह से इस लिस्ट में सारनाथ को जगह नहीं मिल पा रही थी. इसके बाद बनारस से सांसद बने पीएम मोदी ने व्यक्तिगत तौर पर कुछ प्रयास किए, जिसे परिस्थितियां बदलीं और आज 28 साल के बाद सारनाथ को यूनेस्को की हेरिटेज लिस्ट में शामिल कर लिया गया है.

पीएम मोदी ने ऐसे जताई खुशी

यूनेस्को की हेरिटेज लिस्ट में सारनाथ के शामिल होने पर पीएम मोदी खुशी जताई. उन्होंने ट्वीट कर बताया कि “ये जानकर अत्यंत गौरव और प्रसन्नता हुई कि सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूचि में शामिल कर लिया गया है. सारनाथ का भगवान बुद्ध से गहरा संबंध है जिनका बुद्धिमत्ता, करुणा और सद्भाव का शाश्वत सन्देश पूरी दुनिया को प्रेरित करता है.” प्रधानमंत्री के इस ट्वीट के बाद काशी में जश्न का माहौल है.

ऐसे हुए सुधार

वाराणसी के पर्यटन पर पिछले चालीस सालों से काम कर रहे और ICoMoS के मेंबर प्रोफेसर राणा पीबी सिंह के मुताबिक ये वाराणसी और सारनाथ के लिए पर्यटन के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण और मील का पत्थर साबित होने वाली ख़बर है.
1998 में यूनिवर्सिटी ऑफ़ इलिनोइस और यूपी गवर्नमेंट के सहयोग से सारनाथ टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हुआ. लेकिन इसके बाद कोशिशें आधी अधूरी रहने के कारण सारनाथ को अंतिम रूप से विश्व धरोहर सूची में जगह नहीं मिल सका. नवंबर 2024 से पीएम मोदी की निगरानी में गंभीर प्रयास शुरू हुए. जहां जहां कमियां थीं, उन्हें दूर किया गया.

फिर मिला मुकाम

अक्टूबर 2025 में ICoMoS (International Council on Monuments and Sites) के रिप्रेजेन्टेटिव मोहम्मद हबीब(बांग्लादेश ) वाराणसी आएं. उनके साथ संस्कृति मंत्रालय के सचिव स्तर के अधिकारी, एएसआई के डीजी रैंक के अधिकारी और यूपी गवर्नमेंट के बड़े अधिकारी सारनाथ का तीन दिनों तक सर्वे किया. इसके बाद दोबारा से प्रस्ताव भेजा गया. वहीं रिव्यू के बाद 24 जुलाई को सारनाथ को फाइनली एक्सेप्ट कर लिया गया. इस प्रकार सारनाथ यूनेस्को की हेरिटेज लिस्ट में शामिल हो गया.

इन मानदंडों पर पूरा हुआ लक्ष्य

प्रोफेसर राणा पीबी सिंह के मुताबिक यूनेस्को के हेरिटेज लिस्ट में शामिल होने के लिए दस मानदंड (स्टैण्डर्ड्स) तय किए गए हैं. उनमें दो स्टैण्डर्ड पर सारनाथ खरा उतरा और इन दो मानकों को पूरा करने के आधार पर सारनाथ को हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया. इसमें पहला सांस्कृतिक परंपरा की असाधारण गवाही है. वहीं दूसरा कलात्मक, साहित्यिक कार्यों, या ऐतिहासिक विश्वासों और परंपराओं से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा होना है. बौद्ध मत को मानने वाले किसी भी बुद्धिस्ट प्लेस की यात्रा करने के बाद यहां पूजा जरूर करते हैं. ये यूनिक बुद्धिस्ट ट्रेडिशन माना गया है.

क्या आएगा बदलाव?

वाराणसी के टूरिज़्म सेक्टर से जुड़े शैलेश त्रिपाठी के मुताबिक सारनाथ के हेरिटेज लिस्ट में शामिल होने से वाराणसी में कुछ महीनों के अंदर इमिडिएट 10% विदेशी पर्यटक बढ़ जाएंगे.बढ़े हुए ये पर्यटक बौद्ध सर्किट से तो जुड़े होंगे ही उसके अलावा भी यूएस और यूरोप के पर्यटक भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचेंगे. फुट फॉल बढ़ेगा और इससे स्थानीय स्तर पर रोज़गार और कमाई दोनों बढ़ेगी.

यूपी की चौथी साइट सारनाथ

सारनाथ यूपी की वह चौथी साइट है, जिसे यूनेस्को की हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया है. इस लिस्ट में शामिल तीन अन्य साइटों में ताजमहल,आगरा फ़ोर्ट और फतेहपुर सिकरी का नाम पहले से है. ये तीनों साइट आगरा में हैं. वहीं अब चौथी साइट सारनाथ बनारस में है.

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