‘मिडिल ईस्ट की बर्बादी के लिए अमेरिका-इजरायल जिम्मेदार’, वाराणसी में बोले नमाजी

वाराणसी के शिया जामा मस्जिद में रमजान के आखिरी जुमे के बाद भावुक माहौल रहा. नमाज शांति से संपन्न हुई, लेकिन उसके बाद ईमाम अमीन हुसैनी ने घंटे भर की तकरीर की. उन्होंने ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह अली खामनेई को शहीद घोषित किया और उनके समर्थन में जोरदार नारे लगवाए.

शिया जामा मस्जिद में हुई तकरीर Image Credit:

वाराणसी के दारानगर स्थित शिया जामा मस्जिद में रमजान के आखिरी जुमे (अलविदा की नमाज) के बाद एक भावुक तकरीर हुई. इसमें ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह अली खामनेई को शहीद घोषित किया गया और उनके समर्थन में जोरदार नारे लगाए गए. नमाज शांति से संपन्न हुई, लेकिन उसके बाद ईमाम अमीन हुसैनी ने घंटे भर की तकरीर में अमेरिका, इजरायल और सऊदी अरब को ईरान पर हमलों और खामनेई की मौत का जिम्मेदार ठहराया.

ईमाम अमीन हुसैनी ने कहा, ‘यह हमारा धार्मिक मामला है… शिया मुसलमानों का कानून हमें ऐसे धार्मिक मुद्दों पर विरोध जताने की इजाजत देता है… ईरान पर हमले फिलिस्तीन के समर्थन की वजह से हो रहे हैं… मिडिल ईस्ट की बर्बादी के लिए अमेरिका और इजरायल जिम्मेदार हैं… ईरान में 170 स्कूली बच्चों की मौत का जिक्र कर उनके लिए विशेष दुआ पढ़ी गई.’ तकरीर के दौरान नारे लगे: अमेरिका मुर्दाबाद, इजरायल मुर्दाबाद, अल सऊद मुर्दाबाद.

सादगी से मनाई जाए ईद

शिया नमाजियों ने कहा कि मोजताबा अली खामनेई के समर्थन में लड़ाई जारी रहेगी. ईमाम ने अपील की कि इस बार की ईद सादगी से मनाई जाए और ईरान के लिए लगातार दुआएं पढ़ी जाएं. मशहूर बनारसी शिया शायर मातबर बनारसी ने भी तकरीर में हिस्सा लिया और कहा, ‘मौत से खौफ नहीं खाते अली वाले कभी, उनको इस बात की तौफीक खुदा देता है…’

कई शहरों में हो चुका है विरोध प्रदर्शन

दरअसल, ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत के बाद भारत के कई शहरों लखनऊ, जौनपुर, कानपुर, दिल्ली, बुलंदशहर में शिया समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किए. स्थानीय प्रशासन ने नमाज और तकरीर को शांतिपूर्ण बताया, लेकिन ऐसे नारे सामाजिक सद्भाव पर असर डाल सकते हैं. शिया समुदाय ने खामनेई को शहीद मानकर शोक और विरोध जताया, जबकि ईद की सादगी पर जोर दिया.

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