वाराणसी: थियोसोफिकल सोसाइटी जमीन विवाद गरमाया, अब दिशा कमिटी करेगी होटल लीज की जांच

वाराणसी में डेढ़ सौ साल पुरानी थियोसोफिकल सोसाइटी की जमीन होटल के लिए लीज पर देने का मामला गरमा गया है. समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने दिशा कमिटी की बैठक में यह मुद्दा उठाया. इसके बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिशा कमिटी को इस लीज की वैधता जांच करने का निर्देश दिया है.

दिशा कमिटी बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी

वाराणसी में दिशा (जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति) की बैठक सोमवार को सर्किट हाउस सभागार में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की अध्यक्षता में की गई. इस दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने थियोसोफिकल सोसाइटी की प्रॉपर्टी के मुद्दे को उठाया, जिसे दयाल ग्रुप को होटल के लिए लीज पर दे दिया गया था.

करीब डेढ़ सौ साल पुरानी थियोसोफिकल सोसाइटी वाराणसी के कमच्छा में स्थित है. सोसाइटी की 26 बिस्वा जमीन दयाल ग्रुप को 30 साल की लीज पर दिया था. इस पर 65 कमरों वाला थ्री स्टार होटल बनाया जा रहा है. आरोप है कि इसे नियम कानून को ताक पर रख कर दिया गया है. सोसाइटी की कमिटी जमीन लीज पर देने के लिए अधिकृत नहीं है.

सोसाइटी की ट्रस्ट ने डिस्ट्रिक्ट जज अनुमति ली?

सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने ये मुद्दा उठाते हुए कहा कि काशी में शिक्षा और आध्यात्म की अलख जगाने के लिए जिन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया. जिनकी वजह से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना हो सकी. उनकी संस्था को एक होटल कारोबारी को दिया जा रहा है. तीस साल की लीज के लिए डिस्ट्रिक्ट जज की अनुमति लेनी पड़ती है.

उनका कहना है कि क्या सोसाइटी की ट्रस्ट ने डिस्ट्रिक्ट जज अनुमति ली थी? थियोसोफिकल सोसाइटी की कमिटी क्या ऐसा करने के लिए अधिकृत थी? सपा सांसद ने कहा कि ऐसे तमाम मुद्दे हैं जिनकी जांच होनी जरूरी है. इसके साथ ही डीएलडब्लू स्थित गोल्फ कोर्ट का मामला और वरुणा कॉरिडोर परियोजना का मुद्दा भी सांसद वीरेंद्र सिंह ने उठाया.

अब दिशा कमिटी करेगी लीज की वैधता की जांच

वहीं, दिशा कमिटी के अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने वाराणसी के जिलाधिकारी को तीनों मामले की जांच और अध्ययन कर के एक महीने के अंदर सांसद वीरेंद्र सिंह को जानकारी देने का निर्देश दिया. साथ ही निर्देश दिया कि अब दिशा कमिटी थियोसोफिकल सोसाइटी की जमीन लीज पर देने की वैधता और नियमों के पालन की जांच करेगी.

बीएचयू के पूर्व छात्रों ने बनाया था इसे बड़ा मुद्दा

बीएचयू के पूर्व छात्र संघ पदाधिकारी डॉक्टर सूबेदार सिंह के नेतृत्व में छात्रों ने थियोसोफिकल सोसायटी के इस फैसले को बड़ा मुद्दा बनाया था. उनका कहना कि सोसायटी का गठन युवाओं में शिक्षा, आध्यात्म और दर्शन के प्रति अभिरूचि पैदा करने के लिए हुआ. आज इसकी प्रॉपर्टी होटल और पब बनाने के लिए दी जा रही है. क्या इसके इस ट्रस्ट का रिनीवल हुआ है?

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