हनुमान गढ़ी में कब पढ़ी गई थी नमाज? उस समय आईजी रहे बृजलाल ने बताई सच्चाई

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हनुमान गढ़ी में नमाज को लेकर दिए गए बयान के बाद 2003 की एक पुरानी घटना फिर चर्चा में आ गई है. भाजपा नेता और पूर्व डीजीपी बृजलाल ने दावा किया है कि मुलायम सिंह यादव सरकार के दौरान हनुमान गढ़ी के सामने सड़क पर रोजा इफ्तार और नमाज की योजना बनाई गई थी, जिसे लेकर उस समय विवाद हुआ था. उन्होंने कहा कि पुलिस ने नमाज की अनुमति नहीं दी थी.

अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी Image Credit: फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक बयान चर्चा में है. अयोध्या में सीएम योगी ने कहा कि हनुमानगढ़ी में नमाज कराने वाले आस्था की बात करते हैं. राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच के बीच सीएम योगी आदित्यनाथ ने उस घटना का जिक्र कर दिया, जिसके बारे में शायद ही कुछ लोग जानते होंगे. आज हम आपको बताएंगे कि अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी में क्या नमाज पढ़ी गई थी? कब और किसकी सरकार के दौरान यह वाक्या हुआ था?

दरअसल, हनुमान गढ़ी में नमाज पढ़ने की घटना 2003 में हुई थी. इसी साल मुलायम सिंह यादव, सूबे के मुख्यमंत्री बने थे. उन्हें (मुलायम) सीएम की कुर्सी मायावती सरकार के गिरने के बाद मिली थी. इस घटनाक्रम को याद करते हुए बीजेपी के राज्यसभा सदस्य और तत्कालीन आईजी (L&O) रहे बृजलाल ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया कि मुलायम सरकार में हनुमान गढ़ी के सामने नमाज पढ़ने का प्लान किया गया था.

‘मुलायम सरकार में महंत के घर में नमाज’

बृजलाल के मुताबिक, ’29 अगस्त 2003 को मुलायम सिंह, यूपी के मुख्यमंत्री बने थे… इसी दौरान 26 अक्टूबर से लेकर 24 नवबंर 2003 तक रमजान का त्यौहार था… उस दौरान रोजा इफ्तार का दौर चल रहा था… मुलायम सिंह और कांग्रेस की तुष्टिकरण की माहिर खिलाड़ी थी… हद तो तब हो गई जब यह तय हुआ कि हनुमान गढ़ी के सामने रोजा इफ्तार होगा और नमाज पढ़ा जाएगा… उस समय मैं प्रदेश का आईजी लॉ एंड ऑर्डर था और फैजाबाद के एसपी राजीव सभरवाल थे.’

बृजलाल ने आगे कहा, ‘एसपी राजीव सभरवाल ने रोजा इफ्तार और नमाज की अनुमति देने से मना कर दिया… फिर तय हुआ कि महंत के कमरे में रोजा इफ्तार होगा…. महंत का यह कमरा हनुमान गढ़ी की तीन सीढ़ी चढ़ने के बाद आता था… तय हुआ कि कमरे में रोजा इफ्तार और बाहर नमाज होगी… लेकिन पुलिस ने सबको हटा दिया… हालांकि महंत के कमरे में रोजा इफ्तार हुआ और नमाज पढ़ी गई… उस कमरे में भगवान की मूर्तियां थी, जिन्हें अपमानित किया गया था.’

बृजलाल ने बताया, ‘यह तुष्टिकरण की पराकाष्ठा थी… उस समय खूब विवाद हुआ था… लेकिन उस समय यानी समाजवादी सरकार में डीएम-एसपी-कमिश्नर अपने घर में रोजा इफ्तार किया करते थे.’ उन्होंने कहा कि सपा सरकार में सिर्फ तुष्टिकरण होता था… जब योगीजी ने कहा कि सड़क पर नमाज नहीं होगी तब मैंने इस घटना का जिक्र करते हुए एक वीडियो बनाया था… मैं सीएम योगीजी को अपने इस ऐतिहासिक फैसले के लिए बधाई भी दी थी.

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