2027 विधानसभा चुनाव का शंखनाद: मायावती का ब्राह्मण कार्ड, अपने पहले प्रत्याशी के नाम का कर दिया ऐलान

मायावती ने जालौन की माधौगढ़ सीट से आशीष पांडेय को प्रभारी बनाया है. चुनाव तिथियों से पहले घोषित प्रभारियों को ही बसपा प्रत्याशी बनाती है. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मायावती ने ब्राह्मण चेहरे को पहला टिकट देकर बड़ा राजनीतिक कार्ड खेला है.

बसपा के आशीष पांडेय पहले विधानसभा प्रत्याशी

साल 2027 विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ साल भर का समय बचा हुआ है. इसको लेकर राजनीतिक बिसात बिछनी अभी से शुरू हो गई है. सभी पार्टियां अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप दे रही हैं. इस बीच मायावती ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए चुनाव का पहला शंखनाद कर दिया है. बसपा ने जालौन जिले की माधौगढ़ विधानसभा सीट से अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी है.

मायावती ने बड़ा राजनीतिक कार्ड खेला

मायावती ने जालौन की माधौगढ़ सीट से आशीष पांडेय को प्रभारी बनाया है. चुनाव तिथियों से पहले घोषित प्रभारियों को ही बसपा प्रत्याशी बनाती है. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मायावती ने बड़ा राजनीतिक कार्ड खेला है. यूजीसी कानून को लेकर ब्राह्मणों बड़ी संख्या बीजेपी से नाखुश बताई जा रही है. ऐसे में मायावती ये कदम बीजेपी, सपा और कांग्रेस पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की कोशिश के तौर पर दिख रहा है.

2007 की सफलता 2027 में दोहराना चाहती हैं मायावती

हाल ही में यूजीसी कानून और मनोज वाजपेयी की फिल्म का विवादित टाइटल घूसखोर पंडत को लेकर मायावती की जो प्रतिक्रियाएं आई थीं, उससे यह साफ हो रहा मायावती ब्राह्मणों को अपने पक्ष में करना चाहती हैं. 2007 के विधानसभा के चुनावों में उनके द्वारा अपनाई गई सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले के जरिए सत्ता में वापसी चाहती हैं. साथ ही पार्टी यह संदेश भी देना चाहती हैं वह बाह्मणों का हित उनके साथ है.

2007 में बीएसपी ने 86 सीटों पर ब्राह्मणों को टिकट दिया था

साल 2007 में दलित वोटरों के साथ ब्राह्मण और मुस्लिमों को एकजुट करने के लिए बसपा ने काफी प्रयास किए थे, यह प्रयास वोटों में तब्दील भी हो गए थे. हालांकि पांच साल की सरकार के बाद से ही बसपा अपना यह समीकरण बरकरार नहीं रख सकी और सत्ता से बाहर हो गई. साल 2007 में बीएसपी ने 86 विधानसभा सीटों पर ब्राह्मणों को टिकट दिया था और 41 सीटों पर उन्हें जीत हासिल हुई थी.

अब बसपा एक बार फिर राजनीति के इस सफल सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले को अपनाकर एक बार फिर 2007 वाली सफलता दोहराना चाहती है. इसके लिए लिए बसपा की तरफ से प्रयास भी शुरू हो चुके हैं. देखना दिलचस्प होगा कि अन्य राजनीतिक पार्टियां मायावती के इस ब्राह्मण कार्ड का कैसे जवाब देती हैं. वे किस तरह की रणनीति लेकर आते हैं.

पिछली बार मधौगढ़ सीट से बीजेपी को मिली थी जीत

मधौगढ़ सीट से पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के मूलचंद्र निरंजन ने 34,974 वोटों से जीत मिली थी. बसपा की शीतल कुशवाहा दूसरे स्थान पर रही थीं. मूल चंद्र सिंह को कुल 1,05,231 वोट मिले थे, जबकि शीतल कुशवाहा 70,257 वोट के साथ दूसरे नंबर पर रही थीं. वहीं, सपा के राघवेंद्र प्रताप सिंह 63,035 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे.