मायावती का ‘एकला चलो’ कितना दमदार? किसको होगा फायदा?

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मायावती का ‘एकला चलो’ दांव फिर चर्चा में है. बसपा प्रमुख ने साफ किया है कि पार्टी चुनाव में किसी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और अपने दम पर मैदान में उतरेगी. सवाल है कि क्या कमजोर चुनावी प्रदर्शन के बाद भी बसपा अकेले दम पर प्रभाव छोड़ पाएगी? 2022 में बसपा का वोट शेयर करीब 12.7 फीसदी रहा था, जबकि पार्टी सिर्फ एक सीट जीत सकी. अकेले लड़ने से बसपा को अपने कोर दलित वोट बैंक को बचाने का मौका मिल सकता है, लेकिन वोटों का बिखराव भाजपा और सपा-कांग्रेस, दोनों के लिए अलग-अलग सीटों पर फायदे का कारण बन सकता है.

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