‘BJP सनातन की भी सगी नहीं है’, शंकराचार्य बिना स्नान किए माघ मेले से लौटे, तो भड़के अखिलेश यादव
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बिना संगम स्नान किए ही माघ मेला क्षेत्र छोड़ दिया. वह मौनी अमावस्या के दिन से अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे थे. इसे अखिलेश यादव ने कहा कि आज हर सनातनी मन से बेहद दुखी है. बीजेपी के दंभ ने अनादिकाल से चली आ रही सनातनी परंपरा को तोड़ दिया है.
उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बुधवार को बिना संगम स्नान किए ही माघ मेला क्षेत्र छोड़ दिया. उन्होंने कहा कि वे इस माघ मेला में स्नान नहीं करेंगे और उन्हें ‘दुखी मन’ से मेले से जाना पड़ रहा है. शंकराचार्य दोपहर को प्रयागराज से वाराणसी के लिए रवाना हो गए. अब इसपर अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा है.
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य जी का तीर्थराज प्रयाग की धरती पर माघमेले को बिना पवित्र स्नान किये छोड़कर जाना एक अत्यंत अनिष्टकारी घटना है. आज हर सनातनी मन से बेहद दुखी है. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के दंभ ने अनादिकाल से चली आ रही सनातनी परंपरा को तोड़ दिया है.
कोई भी राजनीतिक पद, संतों के मान से बड़ा नहीं…
अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट करके इसके लिए बीजेपी को ज़िम्मेदार ठहराया है. उन्होंंने लिखा, ‘संपूर्ण विश्व का सनातन समाज इससे आहत ही नहीं बल्कि अनिश्चित भय से आशंकित है. संतो का मन दुखी करके कोई सुख नहीं पा सकता है. भूल करने से बड़ी गलती, क्षमा न मांगना है. कोई भी राजनीतिक पद, संतों के मान से बड़ा नहीं हो सकता है.’
उन्होंने लिखा, ‘भाजपा और उसके संगी-साथी चाहते तो सत्ता की हनक और अपने अंहकार को त्यागकर अपने कंधों पर उनकी पालकी उठाकर, उन्हें त्रिवेणी-संगम पर पावन स्नान कराकर, उनके मर्माहत सम्मान का मान रख सकते थे. लेकिन भाजपाइयों को भ्रष्ट साधनों से अर्जित अपनी शक्ति का घमंड है, जो उन्हें ऐसा करने से रोक रहा है.’
आहत संत अर्थात सत्ता का अंत! बोले अखिलेश यादव
कन्नौड से सांसद ने कहा, भाजपा सनातन की भी सगी नहीं है. आज हर सनातनी मन से बेहद दुखी है. धार्मिक अनुष्ठानों में व्यवधान उत्पन्न करनेवालों को क्या कहते हैं, ये भाजपाइयों को समझाने की ज़रूरत है क्या? हमारे महाकाव्यों का यही मूलभूत संदेश है कि घमंड के दंड से कभी कोई दुर्जन नहीं बचता है. आहत संत अर्थात सत्ता का अंत!’
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 18 जनवरी से माघ मेला क्षेत्र में अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे थे. मौनी अमावस्या के दिन उन्हें प्रसासन ने पालकी सहित स्न्नान करने से रोक दिया था. इस दौरान उनके भक्तों से मारपीट की गई. उन्होंने दावा किया कि इतिहास में पहली बार हुआ है कि कोई शंकराचार्य बिना स्नान किए मेला छोड़ कर गए हों.
