‘पहन ले कोई जैसे भी ‘चोले’, उसकी वाणी पोल खोले….शंकराचार्य को लेकर CM योगी के बयान पर अखिलेश का पलटवार

सीएम योगी की तरफ से विधान मंडल के बजट सत्र में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर दिए गए बयान पर अखिलेश यादव ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना, शाब्दिक हिंसा है और पाप भी. ऐसा करने वालों के साथ-साथ उनको भी पाप पड़ेगा जिन्होंने चापलूसी में मेजें थपथपाई हैं.

अखिलेश यादव और सीएम योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश विधान मंडल के बजट सत्र में शुक्रवार यानी 13 फरवरी को सीएम योगी ने पहली बार प्रयागराज में हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता, हर व्यक्ति हर पीठ के आचार्य के रूप में जाकर के जहां-तहां वातावरण खराब नहीं कर सकता. कानून से ऊपर मैं भी नहीं हूं. सबको उन मर्यादाओं का पालन करना होगा. अब सीएम योगी के इस बयान पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पलटवार किया है.

‘शंकराचार्य को अपमानजनक अपशब्द बोलना शाब्दिक हिंसा’

अखिलेश यादव ने अपने X अकाउंट पर ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘पहन ले कोई जैसे भी ‘चोले’, पर उसकी वाणी पोल खोले. उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना, शाब्दिक हिंसा है और पाप भी. ऐसा करने वाले के साथ-साथ उनको भी पाप पड़ेगा, जिन्होंने चापलूसी में मेजें थपथपाई हैं. जब भाजपा के विधायक सदन के बाहर जाएगी और जनता का सामना करेगी तो जनता सड़क पर उनका सदन लगा देगी.

‘महाकुंभ की मौतों पर सच्चे आंकड़े नहीं बताते हैं’

अखिलेश यादव ने आगे कहा कि जो महाकुंभ की मौतों पर सच्चे आंकड़े नहीं बताते हैं. कैश में मुआवजा देकर उसमें भी भ्रष्टाचार का रास्ता निकाल लेते हैं. तक मुआवजा नहीं पहुंचा, उनका पैसा कहां गया, ये तक नहीं बताते हैं. अपने ऊपर लगे मुक़दमे हटवाते हैं. वो किसी और के ‘धर्म-पद’ पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं रखते हैं.

’जब मुँह खोला, तब बुरा बोला’- अखिलेश

अखिलेश यादव ने कहा कि सीएम योगी ने अपने बयान में उन्होंने ‘क़ानून का शासन’ बोल दिया. इस बात पर उनका ध्यान जाएगा वो ‘विधि का शासन’ बोलने के लिए क्या दुबारा सदन बुलाएंगे या इसके लिए एक टांग पर खड़े होकर प्रायश्चित’ करेंगे. उन्होंने आगे कहा कि जब इंसान नहीं, अहंकार बोलता है तो यही होता है. अहंकार संस्कार को विकार में बदल देता है. वो व्यक्ति समाज में मान-सम्मान खो देता है. इस बारे में ही ये कहावत प्रचलित ’जब मुंह खोला, तब बुरा बोला’.

हाता नहीं भाता का विस्तारित रूप है शंकराचार्य पर बयान’

अखिलेश यादव ने कहा कि सपा नेता विनय शंकर तिवारी के ऊपर कार्रवाई के मामले पर भी टिप्पणी करते हुए कहा ‘हाता नहीं भाता’ का ये विस्तारित रूप है, यही सच्ची सच्चाई है. जिस समाज के ख़िलाफ़ रहकर उन्होंने हमेशा अपनी नफ़रत की राजनीति की है, उसे धर्म के मामले में भी अपमानित-पराजित करने का ये उनका अंहकार है. इनका बस चले तो जो विवादित फ़िल्म आई है उसका नाम बदले बिना ही रिलीज़ भी कर दें और टैक्स फ़्री भी कर दें.

‘निंदनीय शब्द को भी निंदनीय महसूस होगा’

अखिलेश यादव ने अपने ट्वीट में लिखा है कि अगले चुनाव में यह समाज एक-एक वोट उनके ख़िलाफ़ डालकर अपने अपमान और उनके प्रदेश अध्यक्ष के नोटिस का सही जवाब देगा. उनकी सरकार हटाकर नयी सरकार बनाएगा फिर इत्मीनान-आराम से मिलजुलकर बेधड़क दाल-बाटी खाएगा. अखिलेश यादव ने आगे कहा कि शंकराचार्य पर दिया गया अभद्र बयान सदन में हमेशा के लिए दर्ज़ हो गया है. उनके इस बयान को हम निंदनीय कहें तो निंदनीय शब्द को भी निंदनीय महसूस होगा.

सीएम योगी ने क्या कहा था?

विधानसभा सदन में शंकराचार्य के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए सीएम योगी ने कहा थि कि साढे चार करोड़ श्रद्धालु जहां पर आए हों, वहां पर जो एग्जिट गेट है जहां से श्रद्धालु स्नान करके बाहर निकल रहा है. उस मार्ग से किसी को बाहर निकलने का कोई हक नहीं. उससे अंदर जाने का कोई प्रयास करता है तो एक नए स्टैम्पेड को जन्म देता है, नई भगदड़ को जन्म देता है. श्रद्धालुओं के जीवन के साथ खिलवाड़ करता है.

उन्होंने कहा, ‘एक जिम्मेदार और मर्यादित व्यक्ति कभी इस प्रकार का आचरण नहीं कर सकता, कभी नहीं कर सकता है. आपको पूजना है सपा के लोग तो पूजें, लेकिन हम लोग मर्यादित लोग हैं, कानून का शासन पर विश्वास करते हैं. कानून का शासन पालन करना भी जानते हैं, पालन करवाना भी जानते हैं. गुमराह करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.’