हर लोकसभा की एक से दो सीट; सपा से गठबंधन का कांग्रेस ने तैयार किया फॉर्मूला
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है. कांग्रेस ने बातचीत के लिए शुरुआती फॉर्मूला तैयार कर लिया है और 115 से 120 सीटों की मांग रख सकती है. पार्टी 2024 लोकसभा चुनाव में जीती 6 सीटों से जुड़े विधानसभा क्षेत्रों के अलावा अमेठी, रायबरेली समेत अपने प्रभाव वाले इलाकों पर दावा करेगी. कांग्रेस 2017 के गठबंधन में मिली 105 सीटों का उदाहरण देकर ज्यादा हिस्सेदारी मांग रही है.
यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है, लेकिन कांग्रेस ने अपनी तरफ से फॉर्मूला तैयार कर लिया है. कांग्रेस बातचीत की मेज पर 115 से 120 सीटों की मांग के साथ पहुंचने की तैयारी में है. पार्टी का फोकस उन सीटों पर भी है, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में उसे जीत मिली थी. आखिर कांग्रेस इतनी सीटों की मांग क्यों कर रही है और समाजवादी पार्टी का रुख क्या है?
उत्तर प्रदेश में कभी मजबूत संगठन वाली कांग्रेस पिछले विधानसभा चुनावों में बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच गई थी. 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 2 सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन का कांग्रेस को फायदा मिला और पार्टी ने यूपी में 6 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की. अब कांग्रेस की नजर 2027 के विधानसभा चुनाव पर है. पार्टी राज्य में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाना चाहती है.
इसके लिए संगठन से लेकर सीटों तक की तैयारी शुरू कर दी गई है. सबसे पहले कांग्रेस संगठन सृजन अभियान के जरिए जिलों में संगठन को मजबूत करेगी. नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के साथ संगठन के कील-कांटे दुरुस्त किए जाएंगे. इसके बाद इसी महीने के आखिर में कांग्रेस समाजवादी पार्टी के साथ सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत शुरू कर सकती है और इस बातचीत के लिए कांग्रेस ने अपना शुरुआती फॉर्मूला भी तैयार कर लिया है.
115-120 सीटों की शुरुआती मांग
कांग्रेस की रणनीति के मुताबिक यूपी की 80 लोकसभा सीटों में जिन क्षेत्रों में उसका आधार है, वहां विधानसभा की कम से कम एक सीट मांगी जाएगी. कुछ लोकसभा क्षेत्रों में पार्टी दो विधानसभा सीटों पर भी दावा कर सकती है. कांग्रेस उन सीटों पर भी अपना दावा मजबूत मानेगी, जहां उसके मौजूदा सांसद हैं. इन 6 लोकसभा सीटों में कम से कम 3 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस अपनी मजबूत दावेदारी रखेगी.
वहीं अमेठी, रायबरेली समेत कुछ अन्य इलाकों में कांग्रेस ज्यादा सीटों की मांग कर सकती है. यानी बातचीत की शुरुआत में कांग्रेस का आंकड़ा 115 से 120 सीटों के बीच रहने वाला है. कांग्रेस अपनी इस मांग के पीछे 2017 के गठबंधन का उदाहरण भी दे रही है. कांग्रेस का तर्क है कि 2017 में जब समाजवादी पार्टी सत्ता में थी, तब उसे 105 विधानसभा सीटें दी गई थीं. अब कांग्रेस का दावा है कि 2024 में लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद उसकी स्थिति बदली है.
राहुल गांधी की सक्रियता बढ़ी है…
दलित और मुस्लिम वोटरों के बीच कांग्रेस की पहुंच बढ़ाने की कोशिश हुई है और लोकसभा चुनाव में गठबंधन को भी इसका फायदा मिला. इसी आधार पर कांग्रेस इस बार पहले से ज्यादा सीटों की मांग कर रही है, लेकिन पेंच यहीं फंसता दिखाई दे रहा है. कांग्रेस जहां 115 से 120 सीटों से बातचीत शुरू करना चाहती है. वहीं समाजवादी पार्टी कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक ताकत के हिसाब से ही सीटें देने के पक्ष में नजर आ रही है.
यानी कांग्रेस की मांग और सपा की पेशकश के बीच बड़ा अंतर होना तय माना जा रहा है. कांग्रेस की रणनीति साफ है कि बातचीत की शुरुआत बड़े आंकड़े से की जाए… ताकि अंतिम समझौते में कम से कम 100 सीटों का आंकड़ा हासिल किया जा सके. कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र गौतम का कहना है कि हम सम्मानजनक सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. वहीं, अखिलेश यादव का कहना है कि बात सीट की नहीं, जीत की है.
कांग्रेस ज्यादा सीटों के साथ राज्य में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है… तो सपा अपनी मौजूदा संगठनात्मक और चुनावी ताकत के आधार पर सीटों का बंटवारा करना चाहेगी. दोनों दलों के लिए साथ चुनाव लड़ना राजनीतिक तौर पर अहम है,लेकिन सीटों के बंटवारे की ये बातचीत आसान नहीं होने वाली. अब देखना दिलचस्प होगा कि 115-120 सीटों से शुरू होने वाली कांग्रेस की मांग आखिर कितने पर जाकर रुकती है?
(रिपोर्ट- कुमार विक्रांत)