अलीगढ़ में धड़ से जुड़े दुर्लभ जुड़वां बच्चों का जन्म, प्रसव के दौरान मां की मौत

अलीगढ़ में एक महिला ने अनोखे जुड़वा बच्चे को जन्म दिया. दुर्लभ जुड़वां बच्चों का शरीर एक दूसरे से जुड़ा हुआ है, लेकिन दोनों के सिर अलग-अलग हैं. हालांकि, इसके साथ ही एक दुखद घटना है, प्रसव के दौरान हुई जटिलताओं के चलते बच्चों की मां की मृत्यु हो गई हैं. परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.

अलीगढ़ में धड़ से जुड़े जुड़वां बच्चों का जन्म Image Credit:

अलीगढ़ के सासनी गेट में प्रकृति का दुर्लभ करिश्मा देखने को मिला. जहां एक महिला ने धड़ से जुड़े अनोखे जुड़वां बच्चों को जन्म दिया. हालांकि, प्रसव के दौरान हुई जटिलताओं के चलते बच्चों की मां की दुखद मृत्यु हो गई. बच्चे स्थिर बताए जा रहे हैं. दोनों बच्चों के सिर अलग-अलग है, हाथ और पैर भी अलग है. लेकिन उनका धड़ पीठ और सीने का हिस्सा एक हैं.

परिवार का कहना है कि प्रसव के दौरान महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्यवश इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. पति और अन्य परिजन सदमे में हैं, क्योंकि घर में खुशी का मौका इतनी जल्दी त्रासदी में बदल गया.

जुड़वां बच्चों को अस्पताल से दे दी गई छुट्टी

हालांकि, नवजात जुड़वां बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. दोनों नवजात लड़का है. चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे मामलों में बच्चों का भविष्य कई कारकों पर निर्भर करता है, लेकिन प्रारंभिक जांच में वे खतरे से बाहर दिख रहे हैं. यह घटना अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.

प्रकृति की विचित्रता पर स्थानीय लोगों हैरान

स्थानीय लोगों इस घटना से आवाक हैं और प्रकृति की विचित्रता पर हैरानी व्यक्त कर रहे हैं. साथ ही मां की मौत पर गहरा दुख जता रहे हैं. वहीं, इस मामले में परिवार को इस दुखद समय में समाज से सहानुभूति और सहयोग की जरूरत है. ऐसी दुर्लभ घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि जीवन कितना अनिश्चित और संवेदनशील है.

इलाज का खर्च और परिवार को सहायता- SC

बता दें कि धड़ से जुड़े जुड़वां बच्चों को ‘पैरापैगस’ (parapagus) कहा जाता है. ऐसे बच्चों में अंग साझा करने की संभावना अधिक होती है. इनका जीवन जोखिम भरा होता है. हालांकि, इसे सर्जरी के अलग किया जा सकता है, जो काफी जटिल होती है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इनके इलाज का खर्च और परिवार को वित्तीय सहायता देने के लिए सरकार को निर्देश दिए हैं.

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