बहन JNU में प्रोफेसर और छोटा भाई प्रशासक… जानें राम मंदिर के पहले CEO की फेमिली ट्री

अयोध्या राम मंदिर के पहले सीईओ एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का परिवार बेहद प्रभावशाली है. उनके पिता दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे, बहन जेएनयू में प्रोफेसर हैं और भाई प्रशासक. एनडीए के जरिए वायुसेना में चयनित हुए मिश्रा ने 43 साल देश की सेवा की है. अब वे भगवान राम की सेवा में जुटेंगे.

राम मंदिर के पहले सीईओ एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा

अयोध्या में राम मंदिर के पहले सीईओ एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा एक हाई प्रोफाइल फेमिली से संबंध रखते हैं. मूल रूप से यूपी के देवरिया जिले में भोपतपुरा गांव के रहने वाले एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा इसी साल 30 अप्रैल को सेवानिवृत हुए और अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले सीईओ बने हैं. जितेंद्र मिश्रा का परिवार लंबे समय से गांव से बाहर रहा रहा है. हालांकि उनके चचेरे भाई और परिवार के अन्य लोग आज भी गांव में रहते हैं.

जानकारी के मुताबिक उनके पिता नथुनी मिश्र दिल्ली विश्वविद्यालय में कामर्स विषय के प्रोफेसर थे. दिल्ली में नौकरी की वजह से काफी समय पहले ही उनका पूरा परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया था. इसलिए जितेंद्र मिश्रा, उनके छोटे भाई देवेंद्र मिश्रा और बहन डॉ. वंदना मिश्रा की शिक्षा दीक्षा भी दिल्ली में ही हुई. यह तीनों भाई बहन अपने पिता की कुशल परवरिश की वजह से बचपन से ही काफी होशियार थे.

एनडीए के जरिए हुआ सेना में सिलेक्शन

दिल्ली में 12वीं तक की पढाई के दौरान साल 1986 में जितेंद्र मिश्रा ने एनडीए की परीक्षा दी और एयरफोर्स में चयनित हुए. उन्हें छह दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला था. इसके बाद वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) खड़गवासला में अपना प्रशिक्षण पूरा किया और बाद में भी वह कई प्रतिष्ठित सैन्य संस्थानों में प्रशिक्षण लेते रहे. हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर में भी उन्होंने अपने शानदार नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया था. इसके लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल मिला है.

बहन प्रोफेसर, भाई प्रशासक

जितेंद्र मिश्रा के परिवार में सभी लोग अच्छे पदों पर हैं. उनके छोटे भाई डॉ. देवेंद्र मिश्र दिल्ली के एक मेडिकल कॉलेज में प्रशासक हैं. वहीं बहन डॉ. वंदना मिश्रा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं. राममंदिर के पहले सीईओ बनने के बाद जितेंद्र मिश्रा ने खुशी जाहिर की. कहा कि भगवान के आर्शीवाद से यह उपलब्धि उन्हें हासिल हुई है. 43 साल उन्होंने देश की सेवा की, अब बाकी जिंदगी वह भगवान की सेवा करेंगे.

Follow Us