राम मंदिर चढ़ावा: वैदेही भवन तक पहुंची SIT, कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि की भूमिका भी खंगाली गई

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT जांच अंतिम चरण में है. अंतिम रिपोर्ट से पहले इससे पहले ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि की भूमिका भी खंगाली गई. जांच में वैदेही भवन भी शामिल रहा, जहां गोविंद देव गिरि अयोध्या प्रवास के दौरान ठहरते हैं. उनसे जुड़े अभिलेखों का भी सत्यापन किया गया.

राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी (फाइल फोटो) Image Credit:

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चर्चित चढ़ावा प्रकरण की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है. विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी पड़ताल केवल तत्कालीन महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव तक सीमित नहीं रखी, बल्कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि की भूमिका और वित्तीय जिम्मेदारियों की भी विस्तृत जांच की है.

सूत्रों के अनुसार, SIT ने ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन, चढ़ावा व्यवस्था और कोषाध्यक्ष की प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं का सत्यापन किया. जांच के दौरान संबंधित अभिलेखों की पड़ताल की गई और कई लोगों से पूछताछ भी की गई. हालांकि, जांच में क्या निष्कर्ष सामने आए हैं, इसका आधिकारिक खुलासा अभी नहीं किया गया है.

वैदेही भवन पहुंचकर SIT ने जुटाई जानकारी

चढ़ावा प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआईटी पहली बार 15 जून 2026 को अयोध्या पहुंची थी. प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपने के बाद टीम दोबारा अयोध्या गई थी, जहां लगभग दो दिनों तक विस्तृत जांच की गई. इसी दौरान ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि की भूमिका से जुड़े पहलुओं की भी गहन पड़ताल की गई.

जांच के दौरान एसआईटी की टीम अयोध्या स्थित वैदेही भवन भी पहुंची, जहां स्वामी गोविंद देव गिरि अपने अयोध्या प्रवास के दौरान ठहरते हैं. टीम ने वहां के महंत और सेवादारों से पूछताछ कर उनके प्रवास की प्रकृति, ठहरने की व्यवस्था और वहां किसी स्थायी संपत्ति अथवा विशेष प्रबंध की जानकारी जुटाई.

इसके साथ ही जांच अधिकारियों ने यह भी परखा कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के रूप में उनकी प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियां क्या थीं तथा चढ़ावा प्रबंधन और वित्तीय निगरानी की व्यवस्था में उनकी भूमिका किस सीमा तक थी.

गोविंद देव गिरि से जुड़े अभिलेखों का सत्यापन

सूत्रों का कहना है कि एसआईटी ने इस दौरान स्वामी गोविंद देव गिरि से जुड़े विभिन्न तथ्यों और अभिलेखों का भी सत्यापन किया. हालांकि अंतिम रिपोर्ट में उनके संबंध में क्या टिप्पणी की गई है या उनकी भूमिका को लेकर क्या निष्कर्ष निकाले गए हैं, इस पर अभी आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है.

जांच अंतिम दौर में, जल्द रिपोर्ट सौंपेगी SIT

सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावा प्रकरण की जांच अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और एसआईटी बुधवार से शुक्रवार के बीच अपनी अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप सकती है. इसके बाद शासन रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है.

माना जा रहा है कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही चढ़ावा प्रकरण में ट्रस्ट के विभिन्न पदाधिकारियों की भूमिका, जिम्मेदारियों और जवाबदेही को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी.

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