मर कर भी जिंदा रहेगा भाई! बरसी पर पैदा हुआ बेटा तो रखा वही नाम, मंदिर में दान किए इतने सिक्के

उत्तर प्रदेश के बागपत में एक व्यक्ति ने अपने मृत भाई की बरसी पर जन्मे बेटे का नाम भी उसी के नाम पर रखा, जिससे भाई के पुनर्जन्म की भावना जुड़ी है. खुशी में उन्होंने बेटे के वजन के बराबर सिक्के मंदिर में दान कर तुलादान की रस्म निभाई. यह मार्मिक कहानी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है.

भाई की याद में बेटे का किया तुलादान

उत्तर प्रदेश के बागपत से एक बहुत ही इमोशनल स्टोरी सामने आई है. यहां एक युवक को भाई की बरसी पर बेटा हुआ तो उसने बेटे का नाम भी भाई के नाम पर रख दिया. यहीं नहीं, उसने बेटे के वजन के बाद सिक्के तौर पर गांव के मंदिर में दान कर दिया है. कहा कि उसके बेटे के रूप में ही सही, लेकिन अब उसका भाई जिंदा हो गया है और हमेशा उसके साथ रहेगा. इस मौके पर युवक की बात सुनकर वहां मौजूद गांव के लोग भी भावुक हो गए.

मामला बागपत में छपरौली का है. जानकारी के मुताबिक छपरौली कस्बे के पट्टी धंधान में रहने वाले अक्षय उर्फ टिंकू और उनकी पत्नी सोनम को पिछले साल छह अक्टूबर को बेटा हुआ था. यह वही तारीख है, जब एक साल पहले अक्षय के भाई रोहित की लीवर की बीमारी की वजह से मौत हो गई थी. भाई की मौत के बाद से अक्षय और उसके परिवार के लोग काफी दुखी थे. ऐसे में जब रोहित की बरसी के ही दिन अक्षय को बेटा हुआ तो उसने बेटे का नाम ही रोहित रख दिया.

तुलादान का लिया संकल्प

अक्षय ने बताया कि बेटा पैदा होते ही उसने संकल्प लिया था कि वह रोहित के वजन के बराबर मंदिर में सिक्के दान करेगा. इसी संकल्प के तहत संत शिरोमणि रविदास जयंती पर अपने चार माह के बेटे व पूरे परिवार के साथ गांव में स्थित रविदास मंदिर पहुंचा और तुलादान कराया. इस मौके पर फूलों से सजे तराजू पर एक तरफ अपने बच्चे को रखा और दूसरे पलड़े पर 10 और 20 रुपये के सिक्के रखे गए. इस प्रकार कुल 10 हजार से अधिक रुपयों के सिक्कों से बच्चे को तौलकर पूरी रकम मंदिर को दान कर दी.

सोशल मीडिया में खूब हो रही चर्चा

इस घटनाक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रही हैं. इस तरह के अनोखे तुलादान की खबर सुनकर मंदिर में गांव और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे. यह सभी लोग अक्षय के अपने भाई से प्रेम को देखकर और सुनकर भावुक हो गए. बताया जा रहा है कि बच्चे का वजन छह किलो से थोड़ा ज्यादा निकला था. इतने वजन में करीब 10 हजार रुपये के सिक्के तोले गए हैं. आलम यह था कि भाई की बरसी पर इनके घर में मातम नहीं, बल्कि खुशियां मनाई जा रही थीं.