कैसे हुई त्रिपुरा के डीजीपी की मौत? खबर से बागपत में शोक की लहर, बिहारीपुर के थे अनुराग धनखड़
त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ का अगरतला में संदिग्ध परिस्थितियों में निधन हो गया, जिसकी खबर उनके पैतृक गांव बागपत के बिहारीपुर पहुंचते ही शोक छा गया है. 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी धनखड़ ने सीबीआई, बीएसएफ और संयुक्त राष्ट्र मिशन जैसी कई महत्वपूर्ण एजेंसियों में सेवाएं दी थीं. उनकी अचानक मौत ने परिवार और गांव को स्तब्ध कर दिया है.
त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग धनकड़ का अगरतला स्थित पुलिस मुख्यालय में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. इसकी सूचना उनके पैतृक गांव यूपी के बागपत स्थित बिहारीपुर पहुंची तो लोगों में शोक की लहर दौड़ गई. आनन फानन में बड़ौत में रह रहे उनके परिवार के लोग त्रिपुरा के लिए रवाना हो गए है. फिलहाल उनके अंतिम संस्कार को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
डीजीपी अनुराग धनकड़ मूल रूप से बागपत जिले के बिहारीपुर गांव के रहने वाले थे. इसी गांव में उनका जन्म हुआ और यहीं पर उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा हासिल की. बाद में वह आगे की पढ़ाई के लिए सरूरपुर खेड़की स्थित इंटर कॉलेज और उच्च शिक्षा के लिए जनता वैदिक महाविद्यालय बड़ौत चले गए. जहां से उन्होंने बीएससी (कृषि) की डिग्री हासिल की. पढ़ाई पूरी करने के बाद अनुराग धनखड़ की नियुक्ति बड़ौत स्थित सिंडिकेट बैंक में फील्ड ऑफिसर के पद पर हुई थी.
1994 बैच के थे आईपीएस
बैंक की नौकरी के दौरान ही उनका भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के लिए चयन हो गया और वह वर्ष 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी बने. वह अपनी साफ-सुथरी छवि के दम पर देश की कई महत्वपूर्ण एजेंसियों में काम करते हुए अंततः मई 2025 में त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक की कुर्सी तक पहुंचे. इससे पहले वह राज्य के खुफिया विभाग में उप महानिदेशक (डीआईजी) के पद पर भी सेवाएं दे चुके थे.
इन एजेंसियों भी दी सेवाएं
आईपीएस अनुराग धनखड़ ने अपने तीन दशक से भी अधिक के करियर में सीबीआई, बीएसएफ, सीआईएसएफ और संयुक्त राष्ट्र के कोसोवो मिशन (यूएन मिशन) में भी रहे हैं. वह सीबीआई में एसपी, डीआईजी, ज्वाइंट डायरेक्टर और एडिशनल डायरेक्टर रहे. फिर सीआईएसएफ में आईजी (पर्सनल) रहे. गृह मंत्रालय के अधीन गठित 1984 के सिख विरोधी दंगों की विशेष जांच टीम (एसआईटी) के अध्यक्ष भी रहे हैं.
हवेली वाले के नाम से परिवार की पहचान
अनुराग धनकड़ का परिवार गांव के प्रतिष्ठित और संपन्न परिवारों में गिना जाता है. आज भी उनके परिवार को लोग “हवेली वाले” के नाम से जानते हैं. गांव में उनकी पुरानी पैतृक हवेली आज भी मौजूद है, हालांकि वर्षों से उस पर ताला लगा हुआ है. ग्रामीणों के अनुसार अनुराग और उनके दोनों भाइयों का जन्म इसी हवेली में हुआ था. नौकरी लगने के बाद पूरा परिवार गांव छोड़कर बाहर बस गया. बताया जाता है कि करीब 25 वर्ष पहले वह गांव में एक शादी समारोह में शामिल होने आए थे. उसके बाद दोबारा गांव नहीं आ सके.
पिता के नाम 15 बीघे जमीन
स्थानीय लोगों के मुताबिक आईपीएस अनुराग के पिता सतपाल सिंह धनखड़ के नाम लगभग 15 बीघा कृषि भूमि है. इसे वर्तमान में ईंट-भट्ठे के लिए लीज पर दिया गया है. गांव में आज भी उनके परिवार के कई सदस्य रहते हैं, जबकि पैतृक मकान बंद पड़ा है. अनुराग धनखड़ के तहेरे भाई राजकुमार धनकड़ ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय सतपाल धनकड़ लगातार दो बार बिहारीपुर के ग्राम प्रधान निर्वाचित हुए थे. करीब एक वर्ष पहले बड़ौत स्थित आवास पर उनका निधन हुआ था. उस समय अनुराग धनखड़ अंतिम संस्कार में शामिल होने बड़ौत आए थे.
परिवार में कौन-कौन?
राजकुमार धनखड़ के मुताबिक अनुराग तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे. उनके बड़े भाई विवेक धनखड़ भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में दिल्ली में रहते हैं. वहीं सबसे छोटे भाई रविराज धनखड़ बड़ौत में कॉस्मेटिक/ खिलौने का व्यापार करते हैं. उनके चचेरे भाई लोकेंद्र धनखड़ बागपत में वकील हैं. उनके बाबा हीरा सिंह धनखड़ मेरठ जेल में सुपरिटेंडेंट जेलर रहे थे.