5 लाख दो 1 बच्चा लो… बरेली में मासूमों का सौदा करने वाले डॉक्टर-नर्स समेत 3 गिरफ्तार
बरेली में IPS अंशिका वर्मा ने बच्चा तस्करी के बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है. एक मेडिकल कॉलेज की नर्स और फर्जी डॉक्टर सहित तीन को गिरफ्तार किया गया है. यह गिरोह डेढ़ साल से सक्रिय था, जिसने दो बच्चों को 5 लाख में बेचा. तीसरे बच्चे के अपहरण के प्रयास में पकड़े गए.
उत्तर प्रदेश के बरेली में बच्चा चोरी और तस्करी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. पुलिस ने मेडिकल कॉलेज में काम करने वाली एक नर्स और फर्जी डॉक्टर समेत तीन को गिरफ्तार किया है. इस पूरे मामले का खुलासा आईपीएस अंशिका वर्मा ने किया है. यह गिरोह डेढ़ साल से सक्रिय था, जिसने हाल में दो बच्चों को 5-5 लाख रुपये में बेचा दिया था.
दरअसल, पूरा मामला डेढ़ साल के एक मासूम बच्चे के अपहरण से जुड़ा है, जिसे आंवला थाना क्षेत्र के मनौना श्याम मंदिर से अगवा किया गया था. जांच के दौरान सामने आया कि यह कोई अकेली घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक पूरा गिरोह काम कर रहा था, जो बच्चों को अगवा कर निसंतान दंपतियों को 5-5 लाख रुपये में बेचने का काम करता था.
मेडिकल कॉलेज की नर्स गिरोह की मास्टरमाइंड
एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा ने मामले का खुलासा करते बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने अब तक दो बच्चों को पांच-पांच लाख रुपये में बेचा है. जबकि तीसरे बच्चे का अपहरण करते समय पुलिस ने गिरोह को पकड़ लिया. तीन दिन पहले दो आरोपियों को पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था और बच्चा को बरामद किया था.
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के गिरफ्तार आरोपी अलग-अलग जिलों और राज्यों से जुड़े हुए हैं. वहीं, मेडिकल कॉलेज में काम करने वाली सीता नाम की नर्स इस पूरे गिरोह की मास्टरमाइंड है. वह बदायूं के दातागंज क्षेत्र के गाजीपुर गांव की रहने वाली है और फिलहाल बरेली के मीरगंज क्षेत्र के रसूलपुर गांव में रह रही थी.
फर्जी डॉक्टर-नर्स की मिलीभगत से चलता था नेटवर्क
इसके अलावा, गिरफ्तार दो अन्य आरोपियों में एक संजय कुमार विश्वास मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है और लंबे समय से सीतापुर जिले के महोली क्षेत्र में रहकर अस्पताल चला रहा था. दूसरा केशवराम लखीमपुर खीरी का रहने वाला है. जबकि एक आरोपी उत्तम वाजपेयी है, जो पहले से ही जेल में बंद है और इसी नेटवर्क का हिस्सा रहा है.
जांच में सामने आया कि संजय कुमार विश्वास खुद को डॉक्टर बताकर अस्पताल चला रहा था. हालांकि उसकी डिग्री की जांच अभी जारी है. वहीं केशवराम इंटर पास होने के बावजूद निजी क्लीनिक संचालित कर रहा था. पुलिस को शक है कि यह लोग फर्जी पहचान के सहारे लोगों का भरोसा जीतकर बच्चों की खरीद-फरोख्त के धंधे में लिप्त थे.
यह केवल शुरुआत है, आगे और गिरफ्तारियां संभव
सबसे गंभीर बात यह है कि आरोपी नर्स पूरे गिरोह के साथ सक्रिय भूमिका में पाई गई है. आरोप है कि वह बच्चों की जानकारी और तस्करी में सीधे तौर पर मदद करती थी. उत्तम वाजपेयी भीड़भाड़ वाले स्थानों जैसे मंदिर, अस्पताल और मेलों से बच्चों को निशाना बनाता था. इसके बाद बच्चों को निसंतान दंपतियों को बेचा जाता था. हर बच्चे के बदले मोटी रकम मिलती थी.
पुलिस ने अब तक कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है और बाकी की तलाश जारी है. एसपी अंशिका वर्मा ने कहा है कि यह केवल शुरुआत है और पूरे नेटवर्क को उजागर करने के लिए जांच तेज कर दी गई है. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस गिरोह का संपर्क किन अन्य जिलों और अस्पतालों से जुड़ा हुआ है. आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.