बरेली में रोज कहां से आ रही नशे की बड़ी खेप? ड्रग्स पैडलर जब्बार का खुलासा, रूट चेन खंगालने में जुटी पहुंची

बरेली से देहरादून तक फैले विशाल ड्रग्स नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है. एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने ₹2.6 करोड़ की हेरोइन के साथ ड्रग्स पैडलर जब्बार खान को गिरफ्तार किया. वह महीने में 25 बार बरेली से देहरादून तक छात्रों और युवाओं को निशाना बनाकर सप्लाई करता था. पुलिस अब इस अवैध कारोबार की पूरी रूट चेन खंगालने में जुटी है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके.

सांकेतिक तस्वीर, इमेज सोर्स: AI Image Credit:

एक तरफ उत्तराखंड को नशामुक्त बनाने के लिए अभियान चल रहा है. इस ड्रग्स फ्री देवभूमि मिशन के बीच बरेली से रोजाना नशे की एक बड़ी खेप देहरादून में उतारी जा रही है. इसके लिए काफी बड़ा ड्रग्स नेटवर्क काम कर रहा है. हालांकि शनिवार को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) और मीरगंज पुलिस ने इस नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया. पुलिस ने इस कार्रवाई में फरीदपुर निवासी ड्रग्स पैडलर जब्बार खां को अरेस्ट किया है. पुलिस ने उसके पास से करीब 2.60 करोड़ रुपये की हेरोइन जब्त की है.

पुलिस की पूछताछ में इस ड्रग्स पैडलर ने इस अवैध कारोबार को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं. अब पुलिस उसके बयानों का सत्यापन करते हुए ड्रग्स तस्करी के रूट चेन को खंगालने में जुट गई है. पुलिस की पूछताछ में जब्बार ने बताया कि वह महीने में कम से कम 25 बार बरेली आता था और हर बार करोड़ों की खेप यहां सप्लाई करता था. इसके ही जैसे कई और पैडलर भी हैं, जो नाथ नगरी से उठाकर देवभूमि में नशे की खेप को खपाने में जुटे हैं.

रूट का पता नहीं, टेल तक पहुंची पुलिस

काफी पूछताछ के बाद पुलिस अभी तक इस कारोबार के रूट का पता नहीं कर पाई है. पुलिस के मुताबिक बरेली से तो माल देहरादून जाता था, लेकिन बरेली में यह कहां से आता था, इसकी जानकारी नहीं है. इसी प्रकार बरेली और देहरादून में इस माल को निजी विश्वविद्यालयों, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों और बोर्डिंग स्कूलों के बाहर युवाओं तक पहुंचाया जाता था. यहां से नशे के आदी हो चुके छात्र ही माल को कैंपस के अंदर तक पहुंचाते थे.

ऐसे डाली नशे की लत

पुलिस की पूछताछ में जब्बार ने बताया कि युवाओं को पहले फ्री में नशे की डोज उपलब्ध कराई, वहीं जब उन्हें इसकी लत लग गई तो उनसे पैसों की वसूली शुरू हो गई. वहीं जो लड़के पैसे नहीं दे पाए, उनसे कैंपस के अंदर नेटवर्क बनाकर नशे की खेफ सप्लाई कराई गई. इस प्रकार कैंपस में बड़ी संख्या में छात्र जाने अनजाने इस नेटवर्क का हिस्सा बनते चले गए. देहरादून में हॉस्टल और पीजी में रहने वाले छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण पुलिस के सामने यह भी चुनौती है कि नशे की सप्लाई कहीं छोटे-छोटे नेटवर्क के जरिए तो नहीं हो रही.

ये है तस्करी का बड़ा बाजार

देहरादून और मसूरी में वीकेंड पर युवाओं की आवाजाही बढ़ जाती है. राजपुर रोड, मसूरी डायवर्जन, सहस्त्रधारा और झाझरा जैसे इलाकों में कैफे, फार्महाउस और निजी विला में पार्टियां होती हैं. पुलिस के सामने अब यह पहलू भी है कि बरेली से आने वाली नशे की खेप का इस्तेमाल इन पार्टियों में तो नहीं किया जा रहा था. इसी प्रकार दिल्ली, हरियाणा और पंजाब समेत दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में युवा वीकेंड पर देहरादून और मसूरी पहुंचते हैं. ऐसे में पार्टी कल्चर के कारण नशीले पदार्थों की मांग बढ़ सकती है. तस्करों के लिए यह बाजार इसलिए भी फायदे का सौदा होता है क्योंकि किसी नशीले पदार्थ को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के बाद उसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है.

4 से 6 गुना कीमत

पुलिस के मुताबिक हेरोइन की जो डोज बरेली में 1500 से 2000 रुपये में मिलती है, वहीं देहरादून और मसूरी में 6000 से 8000 रुपये या इससे भी अधिक महंगी हो जाती है. चूंकि इसमें भारी मुनाफा होता है, इसलिए तस्करों में पकड़े जाने का खौफ भी कम होता है. माना जा रहा है कि एक बार में बड़ी खेप ले जाने के बजाय छोटी-छोटी कंसाइनमेंट बनाए जाते थे. इसमें जोखिम भी कम रहता है. जब्बार के महीने में 25 से 30 चक्कर लगाने की जानकारी भी इसी तरफ इशारा करती है.

उत्तराखंड का है गैंग

एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने बताया कि एएनटीएफ और मीरगंज पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 2.60 करोड़ रुपये कीमत की हेरोइन बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया है. आरोपी से पूछताछ कर नशे की सप्लाई से जुड़े अन्य लोगों और नेटवर्क के बारे में काफी जानकारी मिली है. अब पुलिस इस जानकारी को वेरीफाई करने में जुटी है. उन्होंने बताया कि यह गैंग उत्तराखंड का है और इसमें काफी लोग जुड़े हैं.

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