बहन बनी फर्जी IAS तो भाई बना फर्जी PCS…ठगी का कारोबार चलाता था पूरा परिवार, जीते थे लग्जरी लाइफ
बरेली में फेक पीसीएस और आईएस बनकर एक भाई-बहन बेरोजगारों से पैसे ऐंठकर लग्जरी लाइफस्टाइल जीते थे. वह इस काम को पूरे परिवार के साथ मिलकर अंजाम देते थे. पुलिस ने अब इस मामले में पुलिस ने 26 अप्रैल को खुद को आईएस बताने वाली विप्रा शर्मा, उसकी सगी बहन शिखा शर्मा और ममेरी बहन दीक्षा पाठक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. जबकि पिता वीरेंद्र शर्मा और ममेरा भाई अंकित शर्मा अब भी फरार बताए जा रहे हैं.
बरेली में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगी करने वाली फर्जी IAS विप्रा शर्मा की असलियत सामने आने के बाद हर कोई हैरान है. खुद को एडीएम एफआर बताने वाली विप्रा शर्मा और उसका परिवार बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर उनकी मेहनत की कमाई ऐंठता रहा. उसी पैसे से आलीशान जिंदगी जीता रहा. अब इस पूरे मामले में 22 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, जबकि कई और पीड़ित सामने आए हैं. खास बात यह है कि बहन फर्जी IAS तो भाई PCS अधिकारी बनकर ठगी करता था. फिलहाल भाई पिता फरार है.
दरअसल थाना बारादरी क्षेत्र के ग्रेटर ग्रीन पार्क कॉलोनी की गली नंबर 7 में स्थित दो मंजिला आलीशान कोठी इन दिनों सूनी पड़ी है. करीब 2000 स्क्वायर फीट में बनी इस कोठी में विप्रा शर्मा अपने पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा, बहन शिखा शर्मा और ममेरे भाई अंकित शर्मा के साथ रहती थी. पुलिस कार्रवाई के बाद घर पर ताला लटका हुआ है और कॉलोनी में इसी परिवार की चर्चा हो रही है.
जब टीवी 9 भारतवर्ष की टीम ने पड़ोसियों पूछा तो बताया कि विप्रा खुद को IAS अधिकारी बताकर रौब झाड़ती थी. उसकी गाड़ी पर उत्तर प्रदेश सरकार और एडीएम लिखा रहता था. वहीं उसका ममेरा भाई अंकित शर्मा खुद को PCS अधिकारी और तहसीलदार बताता था. दोनों भाई-बहन सरकारी रसूख का डर दिखाकर लोगों को भरोसे में लेते थे और फिर नौकरी लगवाने के नाम पर लाखों रुपए वसूल लेते थे.
आलीशान कोठी में दिखती थी ठगी की काली कमाई
ग्रेटर ग्रीन पार्क स्थित इस कोठी को देखकर कोई भी यही समझता था कि यहां किसी बड़े अधिकारी का परिवार रहता है. घर में इटैलियन मार्बल लगा हुआ था. दीवारों पर रॉयल टेक्सचर और मखमली फिनिश का काम कराया गया था. हॉल में बड़े-बड़े क्रिस्टल झूमर लगे थे और ड्राइंग रूम विदेशी फर्नीचर व महंगे पर्दों से सजाया गया था. कोठी का मॉड्यूलर किचन भी बेहद हाईटेक था. किचन में महंगे नैनो-व्हाइट काउंटर और जर्मन तकनीक वाले साइलेंट सिंक लगाए गए थे. वहीं वॉशरूम में गोल्ड फिनिश फिटिंग्स, स्मार्ट सेंसर वाले शीशे और प्रीमियम इटैलियन वॉशबेसिन लगे थे. घर का हर हिस्सा लग्जरी लाइफस्टाइल की कहानी बयां कर रहा था.
पड़ोसियों के मुताबिक, घर के बाहर अक्सर लग्जरी गाड़ियां खड़ी रहती थीं. कॉलोनी में आने-जाने वाले लोग इस घर की भव्यता देखकर प्रभावित हो जाते थे. किसी को अंदाजा तक नहीं था कि इसी आलीशान कोठी के अंदर बेरोजगार युवाओं को ठगने का खेल चल रहा है. हैरानी की बात यह है कि इस गैंग ने गरीब लोगों को भी नहीं छोड़ा. कॉलोनी में काम करने वाली एक महिला और कुल्फी बेचने वाले युवक से भी नौकरी दिलाने के नाम पर पांच-पांच लाख रुपए ठग लिए गए.
पड़ोसियों का कहना है कि परिवार पिछले करीब 20 साल से यहां रह रहा था. विप्रा के पिता शांत स्वभाव के व्यक्ति हैं, लेकिन बच्चों ने गलत रास्ता चुन लिया. कॉलोनी में रहने वाले एक रिटायर्ड अधिकारी ने बताया कि अगर सच में विप्रा का चयन IAS में हुआ होता तो पूरी कॉलोनी को इसकी जानकारी होती, लेकिन परिवार सिर्फ झूठे रौब के सहारे लोगों को प्रभावित करता रहा.
ब्रांडेड कपड़े, महंगे जूते और करोड़ों की ज्वेलरी का शौक
पुलिस जांच में सामने आया कि विप्रा शर्मा को महंगे और ब्रांडेड कपड़ों का बेहद शौक था. उसके पास जरा, लेविस, ओनली, मैंगो और एलेन सॉली जैसे ब्रांड्स के कपड़े मिले हैं. एथनिक वियर में वह बीबा, डब्लू और रितु कुमार जैसे महंगे डिजाइनर ब्रांड पहनती थी. उसके वार्डरोब में अनीता डोंगरे जैसे डिजाइनर कपड़े भी मिले, जिनकी कीमत हजारों से लेकर लाखों रुपए तक बताई जा रही है.
विप्रा के पास करीब 70 जोड़ी महंगी सैंडिल और जूतियां भी मिली हैं. इनमें जिमी चू और क्रिश्चियन लॉबोटिन जैसे इंटरनेशनल ब्रांड्स शामिल बताए जा रहे हैं. इसके अलावा वह नीडल डस्ट और फिजी गोबलेट जैसी डिजाइनर फुटवियर भी पहनती थी. कॉस्मेटिक और मेकअप का उसका कलेक्शन भी बेहद महंगा था. पुलिस को उसके कमरे से चैनल, डियोर, गुच्ची, टॉम फोर्ड, ला मेर, एस्टी लॉडर और हुडा ब्यूटी जैसे महंगे ब्रांड्स के ब्यूटी प्रोडक्ट मिले हैं.
बताया जा रहा है कि विप्रा सिर्फ अपनी सजावट और मेकअप पर ही लाखों रुपए खर्च करती थी. इसके अलावा उसके पास सोने-हीरे के गहनों के साथ डिजाइनर कुंदन और पोलकी ज्वेलरी का बड़ा कलेक्शन भी मिला है. पुलिस को शक है कि ठगी के पैसों से ही यह पूरी लग्जरी लाइफस्टाइल तैयार की गई थी.
2022 में शुरू किया था ठगी का जाल फैलाना
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि साल 2022 से इस गैंग ने ठगी का जाल फैलाना शुरू किया था. सरकारी नौकरी दिलाने, अधिकारियों से सेटिंग कराने और चयन पक्का कराने के नाम पर युवाओं से मोटी रकम ली जाती थी. नीली बत्ती लगी गाड़ी और सरकारी रुतबे का इस्तेमाल कर लोगों को भरोसे में लिया जाता था.
विप्रा सगी और ममेरी बहनों को पुलिस ने किया गिरफ्तार
प्रीति लॉयल की शिकायत के बाद बारादरी पुलिस ने जांच शुरू की तो पूरे गिरोह की परतें खुलती चली गईं. पुलिस ने 26 अप्रैल को विप्रा शर्मा, उसकी सगी बहन शिखा शर्मा और ममेरी बहन दीक्षा पाठक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. जबकि पिता वीरेंद्र शर्मा और ममेरा भाई अंकित शर्मा अब भी फरार बताए जा रहे हैं. पुलिस ने कार्रवाई के दौरान साढ़े चार लाख रुपए नकद, दो लैपटॉप, तीन पासबुक, दस चेकबुक, चार मोबाइल फोन और दो आईफोन बरामद किए थे. इसके अलावा अलग-अलग खातों में जमा करीब 55 लाख रुपए भी फ्रीज कराए गए हैं.
और बढ़ सकती है ठगी के शिकार लोगों की संख्या
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है. आशंका है कि ठगी का शिकार हुए लोगों की संख्या और बढ़ सकती है. कॉलोनी के लोग अब भी इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे कि सरकारी अफसर बनकर घूमने वाला यह परिवार असल में बेरोजगार युवाओं के सपनों से खेल रहा था.