जमीला क्यों बनी ज्योति? बोली- बुरके में घुटन हो रही थी, तीन तलाक के बाद अपनाया सनातन धर्म

बोकारो की जमीला खातून ने तीन तलाक के बाद सनातन धर्म अपनाकर ज्योति देवी नाम रखा है. उसकी शिव भक्ति की वजह से उसके शौहर ने तलाक दिया था. बरेली में प्रकाश रविदास से वैदिक रीति से विवाह कर ज्योति ने कहा कि उसे बुरके में घुटन हो रही थी. अब वह सनातन परंपरा में नई पहचान पाकर खुश है.

जमीला खातून ने अपनाया सनातन, बनी ज्योति देवी Image Credit:

झारखंड के बोकारो की रहने वाली 18 वर्षीय जमीला खातून ने बरेली आकर ना केवल सनातन धर्म अपनाया है, बल्कि यहां वैदिक रीति रिवाज से मंदिर में एक हिंदू युवक से शादी भी रचा ली है. सनातन अपनाने के बाद जमीला ने अपना नया नाम ज्योति देवी रखा है. जमीला के मुताबिक भगवान शिव की पूजा करने पर पहले शौहर और ससुराल वालों ने उसके साथ मारपीट की और फिर तीन तलाक देकर उसे घर से निकाल दिया. बेसहारा जमीला ने अपने परिचित प्रकाश रविदास का हाथ थामा और दोनों झारखंड से बरेली आ गए.

यहां दोनों ने अगस्त्य मुनि आश्रम में वैदिक रीति-रिवाज से विवाह किया है. जमीला के मुताबिक वह बोकारो जिले के लोधी नीच टोला, कुर्कनालो की रहने वाली है. उसके पिता का नाम आबिद अंसारी है. कहा कि उसे भगवान शिव में पहले से ही आस्था थी और वह चुपचाप भगवान शंकर की पूजा करती थी. इसकी जानकारी शौहर और ससुराल वालों को हुई तो उन्होंने इसके लिए मना किया. वहीं जब उसने पूजा नहीं छोड़ा तो मारपीट के बाद तलाक देकर घर से निकाल दिया.

प्रकाश ने थामा हाथ

इस मुश्किल समय में हजारीबाग जिले के चानो, ऊंचाघना निवासी 22 वर्षीय प्रकाश रविदास ने उसका साथ दिया. प्रकाश जगदेव रविदास का बेटा है. दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और धीरे-धीरे उनका रिश्ता प्रेम में बदल गया. इसके बाद दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज से शादी करने का फैसला लिया. जमीला ने बताया कि स्थानीय स्तर पर विरोध और परिवार की अड़चनों की आशंका को देखते हुए दोनों झारखंड से बरेली पहुंचे. यहां उन्होंने अगस्त्य मुनि आश्रम के आचार्य केके शंखधार से संपर्क किया. जहां दोनों की पहचान संबंधी दस्तावेजों की जांच हुई.

शुद्धिकरण के बाद बदला नाम

आश्रम में आचार्य केके शंखधार ने जमीला का सनातन परंपरा के अनुसार शुद्धिकरण कराया. बताया कि गंगाजल और गोमूत्र का आचमन कराने के बाद जमीला से तीन बार संकल्प कराया गया. इसके बाद गायत्री मंत्र का जाप कराया गया और उसे सनातन धर्म की दीक्षा दी गई. धर्म परिवर्तन और नामकरण के बाद प्रकाश और ज्योति का विवाह वैदिक रीति से कराया गया. विवाह के बाद ज्योति ने कहा कि बुरके में घुटन महसूस हो रही थी.

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