घर छोड़ा, गांव छोड़ा… तोताराम के प्यार में रजिया बनी गौरी, खाई 7 जन्म साथ निभाने की कसमें
हरदोई की रजिया ने बरेली में अपने प्रेम तोताराम से शादी के लिए धर्म परिवर्तन कर गौरी नाम अपनाया. जयपुर के ईंट भट्ठे पर शुरू हुई प्रेम कहानी ने परिवार के विरोध के बावजूद सात फेरे लिए. शिव भक्त गौरी ने अपनी इच्छा से सनातनी बनकर हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया. यह प्रेम कहानी त्याग और आस्था का प्रतीक है.
प्यार के लिए सब कुर्बान, ये लोकोक्ति आपने खूब सुनी होगी, आज बरेली में यह देखी भी गई है. हरदोई की रहने वाली युवती रजिया ने प्यार के लिए अपना घर छोड़ा, परिवार छोड़ा, यहां तक कि धर्म भी छोड़कर सनातनी बन गई. बरेली में उसने धर्म परिवर्तन के बाद बरेली के फरीदपुर निवासी प्रेमी तोताराम से शादी कर ली है. दोनों की दोस्ती राजस्थान के जयपुर में एक ईंट भट्ठे पर हुई. दोनों वहां मजदूरी करते थे. इनकी दोस्ती चार साल चली और अब ये शादी के बंधन में बंध गए हैं.
शादी से पहले रजिया ने स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन किया. उसने खुद का नया नाम गौरी देवी रखा. कहा कि उसे भगवान शिव से अगाध प्रेम है. इसके बाद बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में आचार्य केके शंखधार ने उसका विवाह तोताराम से कराया. रजिया ने बताया कि तोताराम से उसकी पहली मुलाकात करीब चार साल पहले जयपुर में एक ईंट भट्ठे पर हुई. दोनों वहां मजदूरी करते थे. उनके बीच पहले दोस्ती हुई और कब एक दूसरे से प्यार हुआ, उन्हें पता ही नहीं चला.
साथ जिंदगी बिताने का लिया फैसला
फिर समय गुजरने के साथ दोनों ने साथ जिंदगी बिताने का फैसला कर लिया. वहीं, तोताराम ने बताया कि रजिया बचपन से ही हिंदू धर्म में आस्था रखती है. वह भगवान शिव को अपना इष्ट देव मानती है और उनकी पूजा करती है. दोनों के मुताबिक, परिवार की ओर से उनके रिश्ते को स्वीकार नहीं किया जा रहा था. ऐसे में दोनों ने प्यार के खातिर घर परिवार से अलग रहने का फैसला कर लिया. इस माके पर रजिया ने कहा कि उसने धर्म परिवर्तन किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी इच्छा से किया है.
प्रमाणपत्रों की जांच के बाद हुआ विवाह
दोनों अगस्त्य मुनि आश्रम पहुंचे और आचार्य केके शंखधार को अपनी प्रेम कहानी बताई. दोनों ने अपनी इच्छा से विवाह करने की बात कही. आश्रम में विवाह से पहले दोनों के बालिग होने से जुड़े प्रमाणपत्र देखे गए. इसके बाद धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया कराई गई और रजिया का नाम गौरी देवी रखा गया. इसके बाद आश्रम में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कराया गया. दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और सात फेरे लेकर साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया.