बरेली में बनेगा ऐसा पार्क जहां जटायु बताएंगे नारी सम्मान का मतलब, 2.47 एकड़ में होगा फैला
बरेली के आदीनाथ चौक पर बन रहा 'मातृशक्ति उद्यान' जटायु के साहस से नारी सम्मान और सुरक्षा का संदेश देगा. यह अनूठा पार्क लगभग 10 हजार वर्गमीटर में नाथ कॉरिडोर का हिस्सा होगा. यहां विशाल जटायु प्रतिमा, शक्ति रंगमंच और वीरांगना चौक जैसे आकर्षण होंगे, जो नारी सुरक्षा का संदेश देंगे.
बरेली नाथ नगरी में अब भगवान राम की कथा से जुड़ा जटायु का साहस लोगों को नारी सम्मान और सुरक्षा का संदेश देगा. नाथ कॉरिडोर के तहत आदीनाथ चौक के पास करीब 10 हजार वर्गमीटर जमीन में मातृशक्ति उद्यान विकसित करने की योजना है. इस उद्यान की पूरी थीम नारी सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण पर आधारित होगी. यहां आने वाले लोगों को मनोरंजन के साथ महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान का संदेश भी मिलेगा.
रामायण में जटायु का प्रसंग नारी सम्मान और साहस की मिसाल माना जाता है. जब रावण माता सीता का हरण कर उन्हें लेकर जा रहा था, तब जटायु ने उसे रोकने की कोशिश की. उम्र अधिक होने के बावजूद जटायु ने रावण से मुकाबला किया और माता सीता को बचाने के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए. इसी घटना को मातृशक्ति उद्यान की मुख्य थीम बनाया जा रहा है.
विशाल जटायु प्रतिमा बनेगी मुख्य आकर्षण
मातृशक्ति उद्यान में सबसे खास आकर्षण विशाल जटायु की प्रतिमा होगी. प्रतिमा को इस तरह विकसित करने की योजना है कि यहां आने वाले लोगों को जटायु के साहस और त्याग की कहानी आसानी से समझ में आए. प्रतिमा के आसपास फव्वारे, जल तत्व और आकर्षक रोशनी की व्यवस्था भी की जाएगी. रात के समय रोशनी से उद्यान का स्वरूप और सुंदर बनाने की तैयारी है.
उद्यान में संकल्प प्रांगण भी बनाया जाएगा. यहां लोग नारी सम्मान और उनकी सुरक्षा का संकल्प ले सकेंगे. इसके अलावा शक्ति पथ विकसित किया जाएगा. इस रास्ते पर महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़े प्रेरक संदेश लगाए जाएंगे. अलग-अलग स्थानों पर कलात्मक स्थापनाएं भी तैयार की जाएंगी, जिससे पार्क की थीम लोगों को दिखाई भी दे और समझ में भी आए.
शक्ति रंगमंच पर होंगे जागरूकता कार्यक्रम
मातृशक्ति उद्यान में शक्ति रंगमंच भी प्रस्तावित है. यहां समय-समय पर महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम कराए जा सकेंगे. आत्मरक्षा का प्रशिक्षण, महिला सुरक्षा से जुड़े संवाद और अन्य सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करने की व्यवस्था भी होगी. इससे उद्यान केवल घूमने और मनोरंजन की जगह नहीं रहेगा, बल्कि लोगों को जागरूक करने का माध्यम भी बनेगा.
उद्यान में वीरांगना चौक और वीरांगना उद्यान भी विकसित किए जाएंगे. इन्हें देश और समाज के लिए उल्लेखनीय काम करने वाली महिलाओं को समर्पित किया जाएगा. यहां अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान देने वाली वीर महिलाओं और प्रेरणादायक महिला व्यक्तित्वों की जानकारी प्रदर्शित की जा सकती है.
परिवारों को ध्यान में रखते हुए पार्क में बच्चों के लिए खेल क्षेत्र भी बनाया जाएगा. लोगों के बैठने के लिए स्थान, भोजन प्रांगण और घूमने के लिए बेहतर रास्ते तैयार किए जाएंगे. इससे शहर के लोगों के साथ बाहर से आने वाले पर्यटक भी यहां कुछ समय बिता सकेंगे.
नाथ परंपरा से जुड़ेगा मातृशक्ति का संदेश
मातृशक्ति उद्यान को नाथ परंपरा से भी जोड़ा जा रहा है. नाथ परंपरा में मां पार्वती को शक्ति के स्वरूप में माना जाता है. इसी शक्ति के भाव को जटायु के साहस और माता सीता की रक्षा के प्रसंग से जोड़कर उद्यान की कल्पना की गई है. अधिकारियों का मानना है कि इससे नाथ कॉरिडोर को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ सामाजिक संदेश भी मिलेगा.
बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय के अनुसार, जटायु ने माता सीता की रक्षा के लिए रावण से मुकाबला कर नारी सम्मान और सुरक्षा की बड़ी मिसाल पेश की थी. उसी भावना को आधुनिक रूप में लोगों तक पहुंचाने का प्रयास मातृशक्ति उद्यान के माध्यम से किया जा रहा है. रक्षाबंधन के अवसर पर यहां नारी सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लेने की परंपरा शुरू करने की भी योजना है.
इस तरह आदीनाथ चौक के पास बनने वाला यह उद्यान बरेली के लोगों के लिए मनोरंजन और घूमने की नई जगह तो बनेगा ही, साथ ही जटायु के साहस, त्याग और नारी सम्मान का संदेश देने वाला प्रमुख केंद्र भी बन सकता है. नाथ कॉरिडोर के विस्तार के साथ यह स्थान शहर में पर्यटन का नया आकर्षण बनने की उम्मीद है.