ओसामा-बगदादी को जिन कुत्तों ने खोजा, उसी नस्ल के डॉग बने बरेली पुलिस की ताकत; जानें क्या है खासियत

बरेली पुलिस के डॉग स्क्वाड में दो नए प्रशिक्षित कुत्ते शामिल हुए हैं, जिनमें बेल्जियन शेफर्ड मेलिनोइस नस्ल का 'बेन' प्रमुख है. यह वही नस्ल है जिसने ओसामा-बगदादी जैसे आतंकवादियों को खोजने में मदद की थी. अपनी तेज सूंघने और ट्रैकिंग क्षमता के कारण बेन अपराधियों की तलाश, लापता लोगों की खोज और अहम जांचों में पुलिस की बड़ी मदद करेगा.

बरेली पुलिस का डॉग स्क्वायड Image Credit:

उत्तर प्रदेश के बरेली पुलिस का डॉग स्क्वाड अब पहले से ज्यादा मजबूत हो गया है. पुलिस को दो नए प्रशिक्षित खोजी कुत्ते मिले हैं. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा बेल्जियन शेफर्ड मेलिनोइस नस्ल के बेन की हो रही है. यह वही नस्ल है, जिसका इस्तेमाल दुनिया के बड़े आतंकवाद विरोधी अभियानों में किया गया था. अब इसी नस्ल का खोजी कुत्ता बरेली में अपराधियों की तलाश, लापता लोगों की खोज और अहम मामलों की जांच में पुलिस की मदद करेगा.

इसके साथ ही लैब्राडोर रिट्रीवर नस्ल की चिक्की को भी डॉग स्क्वाड में शामिल किया गया है. पहले से मौजूद लाना के साथ अब बरेली पुलिस के पास तीन प्रशिक्षित खोजी कुत्ते हो गए हैं. बेल्जियन शेफर्ड (मेलिनोइस) नस्ल अपनी तेज रफ्तार, गजब की सूंघने की क्षमता और लंबी दूरी तक लगातार ट्रैकिंग करने की खूबी के लिए जानी जाती है. यही वजह है कि दुनिया की कई बड़ी सुरक्षा एजेंसियां इस नस्ल के कुत्तों का इस्तेमाल करती हैं.

ओसामा-बगदादी को इसी नस्ल ने ढूंढा

वर्ष 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के खिलाफ हुए अमेरिकी ऑपरेशन में इसी नस्ल का कुत्ता शामिल था. इसके बाद वर्ष 2019 में आईएसआईएस सरगना अबू बक्र अल-बगदादी के खिलाफ चलाए गए अभियान में भी इसी नस्ल के प्रशिक्षित डॉग शामिल हुए थे. अब यही नस्ल बरेली पुलिस की टीम का हिस्सा बन गई है. एसएसपी अनुराग आर्य के मुताबिक ऐसे खोजी कुत्ते अपराधियों का पीछा करने, गंध पहचानने और कठिन परिस्थितियों में सुराग तलाशने में काफी मददगार साबित होते हैं.

नौ महीने की हुई कठिन ट्रेनिंग

बेन और चिक्की दोनों की उम्र करीब डेढ़ साल है. इन्हें मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित बीएसएफ के टेकनपुर ट्रेनिंग सेंटर में करीब नौ महीने तक विशेष प्रशिक्षण दिया गया. इस दौरान दोनों को अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने की ट्रेनिंग दी गई. उन्हें मानव गंध पहचानना, संदिग्ध व्यक्ति का पीछा करना, लापता लोगों की तलाश करना और घटनास्थल से मिले सुरागों के आधार पर खोज अभियान चलाना सिखाया गया. आने वाले समय में बेन को विस्फोटक सामग्री पहचानने का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे उसकी उपयोगिता और बढ़ जाएगी.

10 किमी ट्रैकिंग की क्षमता

एसएसपी अनुराग आर्य अनुसार बेन करीब 10 किलोमीटर तक लगातार ट्रैकिंग करने की क्षमता रखता है. उसकी सूंघने की ताकत और फुर्ती उसे दूसरे सामान्य कुत्तों से अलग बनाती है. यही कारण है कि उसे भविष्य में और भी विशेष जिम्मेदारियां दी जाएंगी. डॉग स्क्वाड में शामिल होने के कुछ समय बाद ही बेन ने अपनी उपयोगिता साबित कर दी. आंवला के मोहल्ला खेड़ा में छह वर्षीय दिव्यांग बच्चा प्रीत बारिश के दौरान गहरे नाले में गिरकर लापता हो गया था. नगरपालिका की कई टीमें और एसडीआरएफ करीब 47 घंटे तक उसकी तलाश करती रहीं, लेकिन सफलता नहीं मिली. लेकिन इस डॉग ने तत्काल बच्चे के शव को ढूंढ निकाला.

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