पहले 10 लाख की ठगी, फिर पुलिस ने पीड़ित को ही बंधक बनाकर वसूल लिए 50 हजार; हो गया एक्शन
बरेली में एक प्लॉट खरीदने वाले पीड़ित के साथ पहले 10 लाख की धोखाधड़ी हुई. फिर न्याय दिलाने की बजाय, पुलिसकर्मियों ने उसे बंधक बनाकर 50 हजार रुपये वसूले. पीड़ित ने एसएसपी से शिकायत की, जिसके बाद जांच में आरोप सही पाए गए. एसएसपी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चारों आरोपी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है और विभागीय जांच के आदेश दिए हैं.
वैसे तो उत्तर प्रदेश पुलिस हर पीड़ित को न्याय दिलाने का वादा करती है, लेकिन बरेली में तो पुलिस ने ही एक पीड़ित को बंधक बनाकर लूट लिया. मामला हाफिजगंज क्षेत्र के आसपुर हसन अली गांव का है. आरोपी पुलिस कर्मियों के चंगुल से छूटे पीड़ित ने एसएसपी से न्याय की गुहार लगाई. फिर एसएसपी ने मामले की जांच कराई और आरोप सही पाए जाने पर चारों आरोपी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है.
पीड़ित सोमवीर कश्यप ने एसएसपी को दिए शिकायत में बताया कि उसे एक प्लॉट खरीदना था. इसके लिए प्रॉपर्टी डीलर प्रेम बाबू यादव से उसकी बातचीत हो गई. फिर 12 मई को प्रेम यादव ने उसे एग्रीमेंट कराने के बहाने न्यू विलयधाम स्थित अपने ढाबे पर बुलाया. वहां से वह उसे साथ लेकर निकला और रास्ते में डोहरा रोड पर उसके रुपयों से भरा बैग किसी को दे दिया और खुद वहां से फरार हो गया.
फिर हुई पुलिस की एंट्री
वह प्रापर्टी डीलर की तलाश में रोज उसके ढाबे पर आने लगा. इसी बीच चार पुलिस कर्मी ढाबे पर आए और उसे जबरन उठाकर अपनी गाड़ी में डाल दिया. इसके बाद थाने लाकर उसे अपने क्वार्टर में बंधक बना लिया. इस दौरान आरोपी पुलिसकर्मियों ने 10 लाख की रकम भूल जाने का दबाव बनाया. यही नहीं, थाने से उसे छोड़ने के लिए 50 हजार रुपयों की डिमांड की. दो दिन बाद उसके परिजनों ने जैसे तैसे रकम की व्यवस्था की, इसके बाद ही उसे थाने से बाहर जाने दिया गया.
एसएसपी की जांच में हुई पुष्टि
छूटने के बाद पीड़ित ने एसएसपी अनुराग आर्य से मिलकर न्याय की गुहार लगाई. एसएसपी ने अपने स्तर पर मामले की जांच कराई और आरोपों की पुष्टि होने के बाद उन्होंने चारों पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया है. इसी के साथ एसएसपी ने मामले की विभागीय जांच के भी आदेश दिए हैं. एसएसपी अनुराग आर्य के मुताबिक मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है. दोष प्रमाणित होने पर सख्त एक्शन होगा.