गन्ने की ‘मैली’ बदलेगी बिजनौर की किस्मत! बनेगी CNG-PNG; रिलायंस समेत बड़ी कंपनियां मैदान में
बिजनौर अब गन्ने की मैली (प्रेसमड) से CNG-PNG उत्पादन का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है. चीनी मिलों के कचरे को ग्रीन एनर्जी में बदलकर प्रदूषण कम होगा और स्थानीय लोगों को बदबू व गंदगी से राहत मिलेगी. जानकारी के मुताबिक, जिले में 31 अक्टूबर से व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है.
उत्तर प्रदेश का प्रमुख गन्ना उत्पादक जिला बिजनौर अब ग्रीन एनर्जी और सीएनजी-पीएनजी उत्पादन का एक बड़ा हब बनने जा रहा है. जिले की चीनी मिलों से निकलने वाले अपशिष्ट यानी ‘मैली’ (प्रेसमड) का इस्तेमाल अब प्रदूषण फैलाने के बजाय पर्यावरण के अनुकूल ईंधन बनाने में किया जाएगा. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनी के साथ चीनी मिलों का सहयोग शुरू हो चुका है.
यह पहल भारत सरकार की सतत ऊर्जा नीतियों (जैसे गोवर्धन योजना) के तहत पेट्रोलियम पदार्थों पर विदेशी निर्भरता को कम करने और स्वदेशी स्रोतों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है. जिले में आगामी 31 अक्टूबर से सीएनजी का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है.
कैसे बनती है गन्ने की मैली से सीएनजी?
चीनी मिलों में गन्ने के रस को साफ करने की प्रक्रिया के दौरान भारी मात्रा में जैविक अपशिष्ट निकलता है, जिसे प्रेसमड या मैली कहा जाता है, इस मैली को विशेष प्लांट (सीबीजी/बायोगैस प्लांट) में वैज्ञानिक पद्धति से एनारोबिक (ऑक्सीजन की अनुपस्थिति) तरीके से गलाया जाता, इस प्रक्रिया से भारी मात्रा में मीथेन गैस उत्पन्न होती है.
मीथेन गैस में से अशुद्धियों को हटाकर जब इसे अधिक दबाव (High Pressure) पर कंप्रेस किया जाता है, तो यह सीएनजी (CNG) का रूप ले लेती है, जिसका उपयोग वाहनों में होता है. वहीं, कम दबाव पर कंप्रेस करने से यह रसोई में काम आने वाली पीएनजी (PNG) बन जाती है. शुरुआती चरण में इस प्लांट से केवल सीएनजी का ही उत्पादन किया जाएगा.
जिले में 9 शुगर मिल, प्लांट को दिक्कत नहीं- DM
डीएम बिजनौर जसजीत कौर ने बताया कि बिजनौर जिला गन्ने की खेती में अग्रणी है. नौ शुगर मिले है जिसकी वजह से यहाँ कच्चे माल (प्रेसमड) की प्रचुर उपलब्धता है, जिससे प्लांट को चलाने में कोई बाधा नहीं आएगी. चीनी मिलों के लिए भी यह कचरे से अतिरिक्त कमाई का एक बेहतरीन जरिया साबित होगा. प्रशासन इसके लिए तेजी से काम कर रहा है.
उन्होंने आगे बताया कि सीएनजी बनाने के बाद जो वेस्ट बचेगा, वह जैविक खाद के रूप में खेतों में इस्तेमाल हो सकेगा, जिससे किसानों की लागत घटेगी. रिलायंस जैसे बडे औधौगिक ग्रुप प्रेसमड के लिए शुगर मिलो से एमओयू कर रहे है. आने वाले समय में और भी बडे औधौगिक घराने बिजनौर की ओर रूख कर सकते है. इससे युवाओं के लिए रोजगार भी बढ़ेंगे.