‘नाम बड़े, दर्शन छोटे’, बजट पर मायावती की तीखी प्रतिक्रिया, पूछा- यह बहुजन हितैषी है या पूंजीवादी?
बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने केंद्रीय बजट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे "नाम बड़े, दर्शन छोटे" बताते हुए जमीनी स्तर पर सही अमल की कमी पर चिंता जताई. साथ ही मायावती ने सवाल उठाया कि क्या यह बजट गरीब और बहुजन-हितैषी है या पूंजीवादी सोच का पोषक?
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में अपना लगातार नौवां बजट पेश किया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सीतारमण के लगभग 85 मिनट के बजट भाषण को ‘ऐतिहासिक और भविष्योन्मुखी’ बताया. वही, बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने केंद्रीय बजट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. साथ ही जमीनी स्तर पर सही अमल की कमी पर चिंता जताई.
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि भविष्य में बजट के परिणामों को लेकर यही लगता है कि इनके नाम तो बड़े-बड़े हैं, किन्तु जमीनी स्तर पर इनके दर्शन छोटे ना हो तो बेहतर होगा. उन्होंने कहा कि बजट सत्ताधारी पार्टी की नीति, नीयत में चाल, चरित्र और चेहरे का आईना होता है. जिसमें यह झलक मिलती है कि सरकार की सोच वास्तव में गरीब व बहुजन-हितैषी होकर व्यापक देशहित की है या फिर पूंजीवादी और धन्नासेठ समर्थक है.
यह बजट भी आया और गया की तरह तो नहीं?
मायावती ने अपने एक्स पोस्ट में बजट पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं अपने भारत देश के सन्दर्भ में इस बात का भी विशेष महत्व है कि सरकार की नीति दीर्घकाल में आत्मनिर्भरता की अगर है, तो उसके लिए सरकारी क्षेत्र को कितना महत्व देकर बाबा साहेब के कल्याणकारी संविधान के पवित्र मंशा के हिसाब से क्या कार्य किया गया है.
उन्होंने लिखा, ‘इसी क्रम में संसद में आज पेश बजट को भी देखा जाना चाहिए कि कहीं यह बजट भी आया और गया की तरह परम्परागत रूप से मायूस करने वाला तो नहीं है. और साथ ही यह प्रश्न छोड़ दिया है कि पिछले वर्ष के बजट में सरकार द्वारा किये गये दावे, वादे और आशायें क्या आज पूरी की गई है या एक रस्म को निभा कर रह गयी है.’
क्या तुलनात्मक रूप में लोगों के जीवन में परिवर्तन आया?
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा, ‘ क्या तुलनात्मक रूप में लोगों के जीवन में कोई परिवर्तन आया है. वास्तव में जीडीपी से अधिक लोगों के जीवन में बहु-अपेक्षित विकास और गुणात्मक परिवर्तन है जो सीधे तौर पर व्यापक जनहित से जुडे़ हैं. इसपर पहले बात होनी चाहिए. सरकार भी इस पर कुछ रोशनी डाले तो यह लोगों के अच्छे दिन के लिए अच्छी बात है.’