वेतन पर भी नहीं भरा पेट, BSA साहब करने लगे ये गंदा काम, FIR के आदेश

गोंडा BSA समेत 3 लोगों पर भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. बीएसए पर फर्नीचर सप्लाई के ठेके में 15 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप लगा था. अब कोर्ट ने बीएसए को ऐसा करने के लिए दोषी माना है.

रिश्वत मामले में फंसे गोंडा बीएसए Image Credit:

गोंडा में बेसिक शिक्षा विभाग के एक बड़े अधिकारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं. बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अतुल कुमार तिवारी और दो जिला समन्वयकों पर फर्नीचर सप्लाई के ठेके में 15 प्रतिशत कमीशन के रूप में सवा दो करोड़ रुपये (2.25 करोड़) रिश्वत मांगने और 30 लाख रुपये एडवांस लेने का मामला सामने आया है. गोरखपुर की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपों को सही मानते हुए तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है.

टेंडर में एल-1 होने के बावजूद ब्लैकलिस्ट

मामला मोतीगंज क्षेत्र के किनकी गांव निवासी मनोज पांडेय से जुड़ा है, जो नीमन सीटिंग सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के एमडी हैं. कंपनी ने गोंडा के 564 उच्च प्राथमिक और संकुल विद्यालयों के लिए फर्नीचर सप्लाई का टेंडर जीता था. मनोज पांडेय ने कोर्ट में अपील दाखिल कर आरोप लगाया कि उनकी फर्म को सबसे कम दर (एल-1) देने वाली घोषित किया गया, लेकिन बीएसए अतुल तिवारी, जिला समन्वयक (जेम) प्रेमशंकर मिश्र और जिला समन्वयक (सिविल) विद्याभूषण मिश्र ने ठेके की कुल राशि का 15% कमीशन मांगा.

2.25 करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग

4 जनवरी 2025 को बीएसए के राजकीय हाउसिंग कॉलोनी स्थित आवास पर बुलाकर 30 लाख रुपये नकद लिए गए. इसमें 22 लाख बीएसए को, जबकि 4-4 लाख दोनों समन्वयकों को दिए गए. शेष रकम न देने पर कंपनी को दो वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. मनोज पांडेय ने अदालत में ठोस सबूत पेश किए, जिसमें व्हाट्सएप चैट, ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेज शामिल हैं. उन्होंने बताया कि जब एडवांस राशि वापस मांगी तो प्रेमशंकर मिश्र ने महज 1 लाख रुपये लौटाए, लेकिन बीएसए और दूसरे समन्वयक ने इनकार कर दिया.

फर्जी दस्तावेजों का हवाला

बीएसए अतुल तिवारी और समन्वयकों ने कोर्ट में अपना बचाव करते हुए कहा कि कंपनी ने टेंडर में फर्जी दस्तावेज जमा किए थे. मुख्य अनियमितताएं:अनुभव प्रमाणपत्र में राशि 5.91 करोड़ दिखाई गई, जबकि वास्तविक 9.86 लाख रुपये थी. वित्तीय वर्ष 2022-23 का टर्नओवर 19.54 करोड़ बताया गया, लेकिन असल में 14.54 करोड़ था.

बीएसए ने किया ये दावा

अधिकारियों का दावा है कि इन गड़बड़ियों के कारण टेंडर निरस्त किया गया और फर्म को ब्लैकलिस्ट किया गया. बीएसए तिवारी ने कहा कि कंपनी के दस्तावेज फर्जी थे, इसलिए कार्रवाई की गई. अब वे पेशबंदी में कोर्ट चले गए हैं. हालांकि, कोर्ट ने माना कि शिकायतकर्ता के आरोप भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं. आदेश में कोतवाली नगर गोंडा के प्रभारी निरीक्षक को बीएसए अतुल तिवारी, प्रेमशंकर मिश्र और विद्याभूषण मिश्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं.

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