लखीमपुर खीरी: दुधवा टाइगर रिजर्व में मिला दुर्लभ ‘कॉमन ब्रोंजबैक ट्री स्नेक’

दुधवा टाइगर रिजर्व में हाल ही में एक दुर्लभ 'कॉमन ब्रोंजबैक ट्री स्नेक' का पता चला है. यह गैर-विषैला सर्प दुधवा की समृद्ध जैव विविधता का महत्वपूर्ण सूचक है. इस खोज को संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है. यह प्रजाति पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है.

दुधवा टाइगर रिजर्व में दुर्लभ 'ब्रोंजबैक ट्री स्नेक' की खोज Image Credit:

लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व की बेलरायां रेंज में शुक्रवार को दुर्लभ प्रजाति के कॉमन ब्रोंजबैक ट्री स्नेक (Common Bronzeback Tree Snake) का डाक्यूमेंटेशन किया गया. यह गैर-विषैला सर्प जैव विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. यह प्रजाति पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है.

दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच राजमोहन ने बताया कि बेहद शर्मीले और विषहीन प्रजाति के इस सर्प को ‘दुधवा टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशन’ के तहत कार्यरत मोटिवेटर नाज़रून निशा ने देखा. वह घास के मैदान में पक्षियों के सर्वेक्षण से लौट रही थीं, तभी उनकी नजर इस सांप पर पड़ी. यह खोज संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम है.

पतले तांबे जैसे भूरे शरीर वाला दुर्लभ सर्प

नजरुन निशा, वन्यजीव रेस्क्यू में विशेषज्ञता रखती हैं. उन्होंने सर्वेक्षण के दौरान सांप की तस्वीरें भी लीं. बाद में उसके पतले तांबे जैसे भूरे शरीर और पेड़ों पर रहने वाली विशेषताओं के आधार पर उसकी पहचान कॉमन ब्रोंजबैक ट्री स्नेक के रूप में की गई. इस सांप की मौजूदगी स्वस्थ वन वातावरण का संकेत मानी जाती है.

नजरुन निशा ने इस खोज को भविष्य के लिए प्रेरणा देने वाला बताया और कहा कि यह शिक्षा और रिसर्च में भी काम आएगी. उन्होंने बताया कि उन्हें जंगली जानवरों, खासकर सांपों को बचाने और उनकी स्टडी करने में खास दिलचस्पी है. आज तक, उन्होंने मगरमच्छ, मॉनिटर लिज़र्ड, जंगली बिल्लियों और कई दूसरे रेप्टाइल्स को सफलतापूर्वक बचाया है.

छिपकली-कीड़ों को नियंत्रित में रखने में अहम

डॉ. राजामोहन ने बताया कि यह गैर-विषैली प्रजाति छिपकलियों और कीड़ों की आबादी को नियंत्रित कर पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है. वहीं, डिप्टी डायरेक्टर जगदीश आर ने इस खोज को दुधवा की समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण बताया. साथ ही कहा कि लगातार संरक्षण प्रयासों के चलते शोध के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं.

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