गाजियाबाद अपर नगरायुक्त ने मेयर-डीएम-कमिश्नर को लिखा पत्र, मच गया हड़कंप, जानें लेटर में क्या है ऐसा
गाजियाबाद अपर नगरायुक्त जंग बहादुर यादव ने पुलिस कमिश्नर, डीएम, नगरायुक्त और मेयर को पत्र लिखकर अपनी जान को खतरा बताया है. उन्होंने अपने पत्र में निगम उपाध्यक्ष प्रवीण चौधरी और पूर्व निगम उपाध्यक्ष राजीव शर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनसे जान का खतरा बताया है. इस पत्र के सामने आते ही नगर निगम में हड़कंप मच गया है.
गाजियाबाद नगर निगम में एक पत्र ने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया है. अपर नगरायुक्त जंग बहादुर यादव ने अपनी जान को खतरा बताते हुए कई बड़े अधिकारियों को पत्र लिखा है. इस पत्र के सामने आते ही प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है.
इनपर लगाए गंभीर आरोप
अपर नगरायुक्त जंग बहादुर यादव ने पुलिस कमिश्नर, डीएम, नगरायुक्त और मेयर को पत्र लिखकर अपनी जान को खतरा बताया है. उन्होंने अपने पत्र में निगम उपाध्यक्ष प्रवीण चौधरी और पूर्व निगम उपाध्यक्ष राजीव शर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनसे जान का खतरा बताया है. पत्र के सामने आने के बाद निगम के अधिकारियों और पार्षदों के बीच खलबली मच गई है.
नगर निगम के अंदर गुटबाजी
सूत्रों के मुताबिक, इस पत्र के बाद नगर निगम के अंदर गुटबाजी भी साफ तौर पर नजर आने लगी है. अधिकारी और पार्षद अलग-अलग खेमों में बंटते दिख रहे हैं. इससे माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है. फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है. अब सभी की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.
क्या है मामला?
सूत्रों के मुताबिक यह मामला सामुदायिक केंद्र की बुकिंग से जुड़े एक मामले में वित्तीय अनियमितताओं की जांच के दौरान सामने आया.प्रारंभिक जांच में कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया था. जांच के दौरान एक कर्मचारी की अचानक मौत की खबर फैली थी. ऐसे में कुछ लोग आक्रोशित होकर नगर निगम कार्यालय पहुंचे. पीसीएस अधिकारी जंग बहादुर यादव को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने के निर्देश दिए गए थे.
पीसीएस अधिकारी जंग बहादुर ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने का प्रयास किया. किसी भी कर्मचारी को काम करने से न रोका जाए और कानून व्यवस्था बनाए रखने की गुजारिश की. इसी दौरान भाजपा पार्षद प्रवीण चौधरी और कुछ अन्य लोग मौके पर पहुंचे थे.अपर नगरायुक्त जंग बहादुर यादव ने आरोप लगाया कि इस दौरान निगम उपाध्यक्ष प्रवीण चौधरी और पूर्व निगम उपाध्यक्ष राजीव शर्मा ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, झूठे आरोप लगाए और खुलेआम धमकी भी दी.