बिना तलाक की दूसरी शादी, रेप केस में पति को जेल भी भिजवाया; ऐसे मिला लुटेरी पत्नी से छुटकारा

गाजियाबाद फैमिली कोर्ट ने एक व्यक्ति को 7 साल बाद धोखाधड़ी वाली शादी और झूठे रेप केस से मुक्ति दिलाई है. लुटेरी पत्नी ने अपनी पहली शादी छुपाकर दूसरी शादी की, पति और परिवार को फर्जी मुकदमों में फंसाया और पैसे ऐंठने की कोशिश की. कोर्ट ने इसे 'क्रूरता' मानते हुए तलाक मंजूर किया है. पत्नी ने भी कोर्ट में पैसे के लिए यह सब करने की बात स्वीकारी है.

सांकेतिक तस्वीर

उत्तर प्रदेश में ​गाजियाबाद की फैमिली कोर्ट ने 7 साल से शादी के रूप में नरकीय जीवन गुजार रहे एक युवक को बड़ी राहत दी है. कोर्ट में शादी के नाम पर हुए छलावा की पुष्टि होने के बाद लुटेरी पत्नी से तलाक मंजूर हो गया है. इस लुटेरी ने पैसे ऐंठने के लिए ना केवल अपनी पहली शादी को छिपाया, बल्कि पहले पति से बिना तलाक लिए पीड़ित युवक से शादी कर ली. यही नहीं, शादी के कुछ दिन बाद ही इस दुल्हन ने रेप केस में पति और उसके परिवार वालों को जेल तक भिजवा दिया था.

पीड़ित की अर्जी पर गाजियाबाद परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने सुनवाई करते हुए तलाक मंजूर करते हुए पीड़ित को पत्नी के ‘कानूनी जाल’ से मुक्त कर दिया है. यह जानकारी पीड़ित के वकील उमेश भारद्वाज ने दी. उन्होंने बताया कि आरोपी महिला ने एक सोची समझी साजिश के तहत उनके क्लाइंट को फंसाया और उससे पैसे ऐंठने की कोशिश की. हालांकि अदालत में आरोपी महिला की सारी चालाकी धरी रह गई. अदालत में प्रमाणित हुआ कि उसने पहली शादी को छिपाकर दूसरी शादी करने का अपराध किया है. इसके अलावा पति व उसके परिवार को फर्जी मुकदमों में फंसा कर जेल भिजवाया है.

7 साल पहले हुई थी शादी

बता की पीड़ित युवक की शादी 29 अक्टूबर 2018 को मुंबई में रहने वाली एक युवती से हुई थी. शादी के अगले ही महीने से इनके बीच खटपट होने लगा और दुल्हन ने मुंबई में पीड़ित के खिलाफ रेप केस दर्ज कराकर जेल भिजवा दिया था. इस मामले में पीड़ित के परिजनों को भी जेल जाना पड़ा था. पत्नी से प्रताड़ित युवक ने गाजियाबाद आकर फेमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई. इसमें पीड़ित की ओर से वकील उमेश भारद्वाज की जिरह से आरोपी पत्नी की कलई खुल गई और काला सच सामने आ गया.

पत्नी ने मानी गलती

वकील उमेश भारद्वाज ने अपने जिरह से साबित किया यह पूरा विवाह ही एक ‘छल’ था. आरोपी पत्नी पहले से शादीशुदा होने के बावजूद बिना तलाक लिए दूसरी शादी की थी. उसने सिर्फ 100 रुपये के गुजराती स्टांप पर एक अविधिक ‘विवाह विच्छेदनामा’ तैयार करा रखा था. अदालत में जिरह के दौरान पत्नी ने स्वीकार किया कि उसने यह सब पैसे के लिए किया है. उसने बताया कि वह पेइंग गेस्ट (PG) का कारोबार करती है. कोर्ट ने पत्नी का कृत्य को ‘क्रूरता की श्रेणी’ में माना है. इसी के साथ हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत तलाक की डिक्री को मंजूरी दी है.

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