CM सिटी गोरखपुर में सस्ते मिल रहे लग्जरी फ्लैट, लेकिन क्यों और कैसे? जानें पूरी डिटेल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर में जीडीए (गोरखपुर विकास प्राधिकरण) द्वारा अनसोल्ड लग्जरी फ्लैट्स और व्यावसायिक संपत्तियों पर 25% तक की छूट दी जा रही है. एक दशक से बिक न पाई ये प्रॉपर्टी अब संशोधित दरों पर 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर उपलब्ध होंगी. यह योजना जरूरतमंदों को सस्ते आवास और जीडीए को आय बढ़ाने में मदद करेगी.
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपने शहर में घर और फ्लैट सस्ते में मिलने वाला है. वह भी बहुत अच्छे लोकेशन पर है. इसके लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण(GDA) ने योजना तैयार कर ली है और जल्द ही इस योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी है. दरअसल जीडीए के कई प्रोजेक्ट में घर और फ्लैट निर्धारित मूल्य पर नहीं बिक सके हैं. इन सभी प्रापर्टी को अब 25% से भी कम मूल्य पर बिक्री के लिए रखने की योजना है. इसके लिए जल्द ही टेंडर जारी होने वाला है.
जीडीए के अधिकारियों के मुताबिक ऐसी 100 से अधिक आवासीय और 25 से अधिक व्यावसायिक प्रापर्टी है, जिन्हें इस कैटेगरी में रखकर बेचा जाएगा. जीडीए के उपाध्यक्ष आनंद वर्धन सिंह के मुताबिक कुछ आवासीय संपत्तियों की निर्धारित दरों पर बिक्री नहीं हो सकी थी. इन प्रापर्टीजी को अलोकप्रिय श्रेणी में डालकर बेचने की योजना है. इसके लिए निर्धारित मूल्य से 25% कम पर बेचने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है.
जल्द शुरू होगा पंजीकरण
उन्होंने बताया कि शासन से निर्देश मिलने के साथ ही संशोधित दरों पर इन संपत्तियों के आवंटन के लिए पंजीकरण शुरू कर दिया जाएगा. शहर में अपने घर का सपना देख रहे लोग पहले आओ पहले पाओ के आधार पर इन संपत्तियों को खरीद सकेंगे. उन्होंने बताया कि इन संपत्तियों के लिए एक मुश्त भुगतान पर अतिरिक्त छूट दी जाएगी. इस प्रयास से न सिर्फ जीडीए की आय बढ़ेगी, बल्कि जरूरतमंदों को आवास और व्यावसायिक संपत्ति खरीदने में सुविधा होगी.
एक दशक से अनसोल्ड हैं ये प्रापर्टीज
जानकारी के मुताबिक यह संपत्तियां करीब एक दशक से अनसोल्ड हैं. वैसे तो प्राधिकरण हर साल अपनी आवासीय संपत्तियों की कीमत में 10% व्यावसायिक संपत्तियों में 12% की वृद्धि करता है. लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि निर्धारित मूल्य से इन संपत्तियों की कीमत 25 फीसदी तक घटाई जा रही है. यह स्थिति 10 साल से इन संपत्तियों की बिक्री नहीं हो पाने की वजह से है. यह संपत्तियां वसुंधरा आवसीय योजना और लोहिया आवास योजना में हैं.
