HC के ऑर्डर पर कैसे लगे एक साल? टीचर सुसाइड कांड DM का एक्शन, कैमरे के सामने कस दिए BSA के पेंच; Video
गोरखपुर में टीचर के सुसाइड मामले में देवरिया की बीएसए पर गंभीर आरोप लगे हैं. पुलिस के मुताबिक, बहाली के नाम पर 80 लाख रुपये की रिश्वत ली गई थी, जिसमें मृतक शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने 16 लाख दिए थे. देवरिया की डीएम दिव्या मित्तल ने कैमरे के सामने ही बीएसए के पेंच टाइट कर दिए हैं.
गोरखपुर में टीचर सुसाइड कांड की तस्वीर पूरी तरह से साफ हो गई है. पुलिस के मुताबिक इस सुसाइड कांड की पटकथा देवरिया की बीएसए ने लिखी. आरोप है कि एसटीएफ की जांच में पकड़े जाने पर बर्खास्त 3 टीचर्स से बहाली के नाम पर 80 लाख रुपये का रिश्वत लिया गया था. टीचर के सुसाइड केस का खुलासा होने के बाद देवरिया की डीएम दिव्या मित्तल ने भी बीएसए के पेंच टाइट किए हैं. डीएम दिव्या मित्तल ने कैमरे के सामने ही बीएसए की क्लास लगा दी. सीधे पूछ लिया कि हाईकोर्ट के निर्णय को लागू करने में भी आपको एक साल कैसे लग गए?
बता दें कि देवरिया में गौरी बाजार के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में नियुक्त टीचर कृष्ण मोहन सिंह ने दो दिन पहले गोरखपुर में सुसाइड कर लिया था. सुसाइड से पहले टीचर ने 4 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा था और वीडियो भी बनाया था. इसमें बीएसए, उनके आफिस के एक लिपिक समेत अन्य पर गंभीर आरोप लगाए थे. टीचर ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि बहाली के लिए उसने बीवी के गहने बेच दिए, बैंक से 16 लाख का लोन लिया और यह सारा पैसा रिश्वत के रूप में दे दी. बावजूद इसके, शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने उसकी बहाली नहीं की.
सीडीओ कर रहे मामले की जांच
इससे निराश होकर टीचर ने पहले अपने बड़े भाई को संबोधित सुसाइड नोट लिखा और फिर फंदा से लटककर जान दे दिया. इस मामले में टीचर की पत्नी गुड़िया सिंह के तहरीर पर पुलिस ने BSA शालिनी श्रीवास्तव के अलावा उनके आफिस में तैनात तीन कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है. इस मामले में बीएसए कार्यालय में तैनात लिपिक संजीव सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है. वहीं पूरे मामले की जांच देवरिया के सीडीओ राजेश कुमार सिंह को सौंपी गई है.
क्या है सुसाइड के पीछे की कहानी?
जानकारी के मुताबिक साल 2016 में कुशीनगर जिले के हरैया गांव के रहने वाले कृष्णमोहन सिंह की नियुक्ति देवरिया के ग़ौरीबाजार ब्लॉक क्षेत्र में कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में सहायक अध्यापक के रूप में हुई थी. टीचर कृष्णमोहन परिवार के साथ गोरखपुर के शिवपुर में रहते थे. इसी बीच नियुक्तियों में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर यूपी एसटीएफ ने 9 जुलाई 2021 को जांच की और गड़बड़ी की पष्टि होने पर कृष्णमोहन समेत सभी अध्यापकों को बर्खास्त कर दिया गया था. इस मामले में एसटीएफ ने देवरिया में तैनात वित्त लेखा अधिकारी समेत 17 के खिलाफ सदर कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज कराया था.
पिछले साल HC से हुआ बहाली के आदेश
इस बर्खास्तगी के खिलाफ भी टीचर हाईकोर्ट चले गए, जहां से पिछले साल सभी की बहाली के आदेश हो गए. इसी के साथ 2016 से लेकर अब तक की सैलरी का भुगतान करने का भी निर्देश मिले थे. इसके बाद स्कूल प्रबंधक ने सभी टीचर्स को जॉइन कराया और वेतन जारी करने के लिए फाइल बीएसए ऑफिस भेज दिया. बावजूद इसके, बीएसए ने अब तक इन शिक्षकों का वेतन रिलीज नहीं किया है. जबकि इसके लिए कृष्णमोहन ने बीएसए ऑफिस में बाबू संजीव सिंह को 16 लाख की रिश्वत भी दी थी.
