ग्रेटर नोएडा: पहली बारिश भी नहीं झेल पाया 858 करोड़ का नया फ्लाइओवर, कई जगह टूटी सड़क
ग्रेटर नोएडा का हाल ही में खुला रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) पहली ही बारिश नहीं झेल पाया, इसकी सड़क जगह-जगह से उखड़ गई है. DFCCIL ने मरम्मत का काम शुरू कर दिया है, लेकिन स्थानीय लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. करोड़ों की लागत वाले इस प्रोजेक्ट की कमजोर नींव ने सवाल खड़े कर दिए हैं.
ग्रेटर नोएडा में करोड़ों रुपये की लागत से बने रेलवे ओवरब्रिज (ROB) पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है. इसे करीब एक महीने पहले ट्रैफिक के लिए खोले गया था. सड़क कई जगहों से उखड़ गई है. लगभग 100 मीटर लंबे हिस्से में सड़क टूटने और कंक्रीट उखड़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले दो-तीन दिनों से लगातार बारिश के बाद फ्लाईओवर की सड़क कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई. कहीं गड्ढे बन गए तो कहीं सड़क की ऊपरी परत उखड़कर बाहर आ गई. लोगों का कहना है कि जिस फ्लाईओवर को शहर की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जा रहा था, वह मानसून की पहली ही बारिश नहीं झेल पाया.
दो-तीन चरणों में निरीक्षण के बाद हुआ था चालू
वीडियो वायरल होने के बाद डीएफसीसीएल ने मामले का तत्काल संज्ञान लिया. विभाग की ओर से क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है. अधिकारियों का दावा है कि अगले एक से दो दिनों के भीतर पूरी सड़क की मरम्मत कर ट्रैफिक के लिए सुरक्षित बना दिया जाएगा. बता दें कि इसके निर्माण में कुल 858 करोड़ रुपये की लागत आई है.
130 मीटर रोड पर बने इस रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण लंबे समय से चल रहा था. निर्माण पूरा होने के बाद दो तीन चरणों में तकनीकी निरीक्षण किया गया और लगभग एक महीने पहले इसे आम लोगों के लिए खोला गया था. लेकिन इतनी जल्दी सड़क का उखड़ जाना निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है.
केवल मरम्मत पर्याप्त नहीं, जांच होनी चाहिए
शहर के लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से बने फ्लावर की सड़क यदि पहले ही बारिश में टूट जाए तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. लोगों का कहना है कि केवल मरम्मत कर देना पर्याप्त नहीं है बल्कि यह भी जांच होनी चाहिए कि आखिर निर्माण में ऐसी कौन सी कमी रही जिसके कारण यह दशा हुई.
अब लोगों की नजर इस बात पर है कि मरम्मत के बाद सड़क कितनी टिकाऊ साबित होती है और संबंधित एजेंसी निर्माण गुणवत्ता को लेकर क्या कार्रवाई करती है. इसके अलावा, निर्माण कंपनियों पर क्या एक्शन लिया जाएगा?